क्या इतिहास बन जायेगा फाउंटेन पेन

Posted by Nidhi Nirala in Education
December 20, 2017

कलम की ताकत हम सब अच्छे से जानते हैं। कलम में ऐसी ताकत है जो किसी को राजा बना सकती है तो किसी को रंक। कलम की ताकत यदि पूछनी हो तो लेखकों और पत्रकारों से पूछो, कलम ही उनकी पहचान और ताकत होती है।

फाउंटेन पेन का अाविष्कार वॉटर मेन ने किया था। लकड़ी को छील कर उसका नीव बनाया था। लेविस इ वॉटरमैन ने अंगूर के रस से स्याही बनाई और इन दोनों की सहायता से स्याही कलम का निर्माण हुआ था। हमारे पूर्वजों ने स्याही कलम से ही लिखना सीखा था।

परन्तु आज के तारीख में इसका महत्व कम हो गया है। जब से बॉल पेन का अविष्कार हुआ है, तब से स्याही कलम की पहचान खोने लगी है। बॉल पेन का अविष्कार होने का कारण था। स्याही कलम से लिखते वक्त बार-बार नीव को दवात मे डूबोना पड़ता था, इससे वक्त भी बर्बाद होता था। इसलिए हेनरी जार्ज मार्टिन ने एक ऐसा पेन बनाने की शुरुआत की जिससे स्याही को कलम के भीतर ही रखा जाए और कलम में मुख पर एक बॉल(nib) बनाई, जिसके सहायता से कलम भरे स्याही अच्छी तरह से लिखा जा सकता है। और इस तरह से बॉल पेन का निर्माण हुआ था। आज बॉल पेन इस कदर स्याही कलम पर भारी पर गई की स्याही कलम का नामो निशान मिटा दिया है।

 मार्केट में दुकानदारों से पूछ-ताछ में एक ने कहा कि स्याही कलम की बिक्री ना के बराबर है, महीने में एक-दो कलम बिक जाती है। वहीं आदित्य साह का कहना है कि स्याही कलम अपने दुकान में नहीं रखते हैं। राजीव रंजन ने बताया कि उनके दादा, पापा और वो खुद भी स्याही कलम से लिखते थे, स्याही कलम से अक्षर बहुत सुंदर बनते हैं जो बॉल पेन से नहीं बनती हैं। जब पूछा गया कि स्याही कलम के बारे में आपके बच्चे जानते हैं तो राजीव रंजन कहते हैं उनके स्कूल में बॉल पेन से ही लिखने को कहा जाता है। बाज़ार में स्याही कलम की बिक्री ना के बराबर है। कुछ 5-6% बिकती भी है तो उसके खरीदार बुज़ुर्ग होते हैं।

जब छात्रों से पूछा गया कि आपलोग स्याही कलम जानते हैं, उनका प्रयोग कभी किया है तो सबका का कहना है कि स्याही कलम के बारे में नहीं जानते हैं तो उनका प्रयोग करने की तो बात ही दूर है। आज की तारीख में स्याही कलम बस एक इतिहास बन गया है। हर जगह बॉल पेन की ही माँग है।