चरित्रहीन औरत : पद्मा पाण्डेय की कविता

Posted by मेरा रंग | Mera Ranng
December 23, 2017

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औरत को चरित्रहीन
कहने वाले मर्दो को
देखा है, उन गलियों मे जाते हुए

जिस पर वो दाग लगाते है
देखा है, उन दागों को धुलवाते हुए

करते हैं जिन औरतों के
चरित्रहीन होने की बात
देखा है, उन मर्दो को
उनका चीरहरण करते हुए

जिस बदनाम
जिस्म को देखकर
तुम्हे उबकाई आती है
देखा है,
उस जिस्म को नोच-नोचकर
अपनी हवस मिटाते हुए

तुम सुधर जाओ,
तो कोई औरत
चरित्रहीन न होगी
उसकी कभी कोई
तौहीन न होगी

मत बनाओ
उसे बाजारू तुम
तो देखो,
उनकी आत्मा कभी
मलीन न होगी

गौर से देखो,
वो है तुम्हारी मां बेटी, बहन जैसी

दे दो उनको मान तुम
वो है बिल्कुल देवी जैसी!

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