चॉकलेट वाला प्यार

Posted by Dushyant Kumar
December 6, 2017

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कोई 6साल हो गए इस बात को मैं तब दिल्ली नया नया आया था, पर जब भी सोचता हूँ तो ऐसे लगता है जैसे कल ही कि तो बात है। एक छोटे से शहर से बाहर आना वो भी राजधानी में, दिलवालों की दिल्ली में एक दम अलग अनुभव था। ऐसे ही एक दिन बस में उनसे मुलाकात हो गई थी, वो शायद जल्दी में थीं मेरी बराबर वाली सीट पर उनका पर्स छूट गया था और हमारे संस्कारो ने उन्हें वो पर्स लौटाने पर मज़बूर कर दिया। उसके बाद शुक्रिया और कॉफी फिर ऐसे ही मुलाकातों का सिलसिला चल निकला। एक दिन रात को एक बजे मेरा फ़ोन बजा “क्या हम मिल सकते हैं?” उधर से आवाज़ आई। मैंने अपने सीनियर से उनकी गाड़ी की चाबी ली, और थैंक्यू कहते हुए बाहर आ गया। रोड पर ट्रैफिक न के बराबर था और नवम्बर के महीने में वैसे भी ठंड काफी हो जाती है। अब ध्यान आया कि जल्दी जल्दी में अपनी जैकेट तो रुम पर ही भूल आया था। वो अपने फ्लैट के बाहर खड़ी कंधो पर एक बैग टांगे हुए मेरा इंतज़ार कर रही थी। “मैडम, कहाँ की तैयारी है?” गाड़ी को उसके पास ले जा के खिड़की खोलते हुए मैंने पूछा। वो बिना कुछ कहे अंदर आकर बैठ गई, पता नहीं क्यों मेरी उससे इस बार कुछ पूछने की हिम्मत नहीं हुई और मैने गाड़ी को रेस दे दी। अगले 5मिनट तक गाड़ी में एकदम शांति थी न वो कुछ बता रही थी न मैं कुछ पूछ पा रहा था।अगले गोल चक्कर पर मैने एक चाय की दुकान पर गाड़ी रोकी “भैया! 2कटिंग भेजना” गाड़ी का शीशा खोलते हुए मैने आवाज़ लगाई। “मुझे नहीं पीनी” इतने वक़्त बाद उसके मुंह से कुछ निकला था। “चलो मौन व्रत तो नही हैं तुम्हारा” ये कहते हुए मैं उसकी तरफ देखकर हँस दिया, वो भी हल्का सा मुस्कुरा दी। तब तक चाय भी आ गई थी। “चॉक्लेट😋??” अपने बैग में हाथ डालते हुए उसने पूछा, मैंने चाय की तरफ देखते हुए कहा “बाद में”। माहौल को हल्का करने के लिए स्टीरियो ऑन कर दिया था शायद गुरदास मान का कोई पंजाबी गाना बज रहा था उस पर। “मेरी चॉक्लेट??” गाड़ी ड्राइव करते हुए मैने उसकी तरफ देखते हुए पूछा। “यही है अब बस” आंखों से इशारा करते हुए उसने कहा। मैंने उसके हाथ से लेकर चॉक्लेट खाना शुरू कर दिया और वो मुझे देखती रह गई। “ऐसे मत देखो!!इतनी महंगी चॉक्लेट मैं खुद से खरीद के नही खा सकता ना तो ये मौका मैं जाने नही दे सकता” मैन उसकी तरफ देखते हुए कहा। मैने घड़ी की तरफ देखा साढ़े तीन बज रहे थे। “वापस चले?” सामने की तरफ देखते हुए मैं बोला,उसने हाँ में सर हिलाया। उसके फ्लैट के बाहर जाकर मैने गाड़ी रोकी, उसने विंडो खोली और बाहर निकल के बंद कर दी। मैने शीशा नीचे करते हुए उससे पूछा ‘अब तो बता दो इतनी रात को क्यों बुलाया था’
वो मुड़ी ,” तुम पता नही कब समझोगे” कहते हुए मुस्कुराती हुई अपने फ्लैट के अंदर दाखिल ही गई। मैं बस उसे जाते हुए देखता ही रह गया।
#baatein_suni_unsuni
#mid_night_diary

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