पंजाब कानून व्यवस्था का अक्सर शिकार एक सिख ही क्यो होता है ?

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पंजाब में हिंदू और सिख समुदाय की आबादी, लगभग एक समान ही है, अनुपात में थोड़ा सा फर्क ही है, अब जब यंहा दोनों ही समुदाय, की संख्या एक बराबर है, तो धार्मिक संगठन भी दोनों से जुड़े होंगे है, राजनीतिक उठा पठक के लिये, धर्म के आधार पर कई ऐसे कट्टर संगठन भी है, जो धर्म और पंथ को,अक्सर एक दूसरे के लिये खतरा समझते है और अपने, आस्था को बचाने का दम भी रखता है. इसी बीच, हिंसा का प्रयोग भी किया जाता है, लेकिन इस हिंसा का इल्जाम, सिर्फ ओर सिर्फ सिख समुदाय पर ही लगता आया है जिसके कारण, सरकारी हिंसा का शिकार भी एक सिख ही होता है, इसका लंबा चौड़ा इतिहास है लेकिन अगर इसे 20वी सदी से भी समझे तो भी ऐसी बहुत सी घटनाये हुई है जिसका खमियाजा, एक सिख को ही भुगतना पड़ा है.

साल 2007, व्यक्तिगत रुप से मैं पंजाब में ही था ओर मेरे ही गाँव से कुछ 3 किलोमीटर के अंतर पर, बाबा राम रहीम का 100 एकड़ में फैला हआ डेरा है, लेकिन इसी साल, ये डेरा विवाद की शक्ल ले चुका था, बाबा ने पहले अपने आप को सिख गुरु गोबिंद सिंह की वेश भूषा में, सर पर विशेष कलगी लगाकर खुद को पेश किया वही पानी में शरबत रूह अफजा को मिलाकर, अमृत के रूप में बाबा ने अपने भक्तों को बाटा था, लेकिन विवाद तब शुरू हुआ जब बाबा के संगठन द्वारा, प्रचार माध्यम से, बाबा की गुरु गोबिंद सिंह जी की वेशभूषा में मौजूद तस्वीर को पंजाब के मुख्य अखबारों में छपवाया गया, इसी के तहत सिख समुदाय की भावना आहत हुई, प्रदर्शन हुये ओर इसी कारण पुलिस फायरिंग में एक नोजवान की मौत हो गयी. कई दिनों तक,पंजाब इस आग में जलता रहा, कर्फ्यू लगे, वही बाबा के अनुयायी हिंदू समाज में ज्यादा होने के कारण, यंहा धर्म और पंथ के बीच की दूरी ओर बढ़ गयी. (http://archive.indianexpress.com/news/behind-derasikh-clash-the-shadowboxing/31994/)

साल 2009 में भी, मैं व्यक्तिगत रूप से लुधियाना में था, जब दिव्य ज्योति संस्थान के प्रमुख बाबा आशुतोष का प्रचार अभियान के तहत, एक प्रोग्राम लुधियाना में आयोजित किया गया लेकिन इसका भी उग्र विरोध देखने को मिला, वजह थी बाबा आशुतोष, बाबा कई सार्वजनिक सभाओ में, भक्त जनों की संख्या के अनुरूप, कभी सिख पोशाक जंहा, सर पर एक सिख पगड़ी भी मौजूद होती थी वही हिंदू गिनती के ज्यादा होने से, किसी सभा में पूणतः हिंदू संत के किरदार में नजर आते थे, लेकिन बाबा से जुड़े विवाद की वजह थी, की बाबा अपने अनुयायिओं को सिख आस्था के प्रतीक श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रति किसी भी तरह का आदर समान देने से रोकते थे और इनका कहना था की ये खुद भगवान है, ओर पूजा इनकी होनी चाहिये, बाबा को प्रदेश भाजपा के कई नेताओं के साथ साथ कई हिंदू संगठन का साथ भी मिला हुआ था, इसी के कारण, बाबा का विरोध सिख समुदाय द्वारा किया गया जंहा पुलिस फायरिंग में फिर एक सिख नोजवान की मौत हो गयी. लेकिन, पंजाब को सिख आंतकवाद के रूप में जानने वालों को ये ताजुब्ब ही लगेगा कि बाबा आशुतोष का मुख्य डेरा, दिव्य ज्योति संस्थान, पंजाब में जालंधर के पास, नूर महल में ही स्थिति है. अब यंहा सोचने की जरूरत है, की पंजाब का सिख आंतकवाद ओर बाबा आशुतोष की पंजाब के भीतर ही मौजूदगी, दोनों परस्पर विरोधी तथ्य है, क्योकि दोनों की विचारधारा एक दूसरे के विपरीत है और दोनों एक साथ, एक जगह मौजूद नही हो सकते, लेकिन बाबा आशुतोष, जंहा पहले जीवित रूप में पंजाब में मौजूद थे वही आज एक मृतक के रूप में भी, अपने नूर महल के डेरे में मौजूद है. http://m.hindustantimes.com/india/ludhiana-remains-tense-one-killed-2-injured-in-police-firing/story-gPHzgqY2r3vnggYNgyASAM.html

साल 2015, गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं ने पंजाब का माहौल बिगाड़ दिया था, ये घटनाये एक के बाद एक उजागर हो रही थी, इसी के रोष में सिख समुदाय द्वारा किया जा रहा, रोष जो कही भी हिंसा की पहचान नही करवा रहा था, उस पर।पंजाब पुलिस द्वारा फायरिंग की गई जंहा दो सिख नोजवानो की मौत हो गई,http://www.tribuneindia.com/mobi/news/punjab/community/2-dead-in-kotkapura-police-firing/146172.html

लेकिन, महज कुछ फोन रिकॉर्ड के आधार पर, पंजाब पुलिस द्वारा दो सिख भाइयो को गिरफ्तार किया गया, जंहा पुलिस द्वारा आरोप ये लगाया गया कि गुरु ग्रँथ साहिब की बेअदबी की घटनाओ में इन नोजवानो का हाथ हो सकता है, वही पूरा पंजाब, इस गिरफ्तारी के विरोध में खड़ा हो गया, नतीजन पंजाब पुलिस को सबूतों के आभाव में इन दोनों भाइयों को रिहा करना पड़ा, जंहा इस घटना से पंजाब पुलिस की सांक एक बार फिर सवालो के कटघरे में आ खड़ी हुई वही, आज तक गुरु ग्रंथ साहिब जी के, मुल्जिमो को पकड़ने में पुलिस नाकामयाब ही रही है. https://m.timesofindia.com/india/Faridkot-sacrilege-case-Police-arrest-two-brothers/articleshow/49471090.cms

https://www.ndtv.com/india-news/punjab-police-releases-2-brothers-accused-of-desecration-1239280

लेकिन, आज फिर पंजाब, प्रांत की सरकार और पंजाब की पुलिस सुर्खियों में है, वजह है, 2015 से लेकर अब तक, तीन हिंदु संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओ के कत्ल के संदर्भ में पकड़े गये, सिख नोजवान, जंहा दिल्ली का मीडिया इन गिरफ्तारी को ओर हिंदू नेताओ के कत्ल को सिख आंतकवाद, खालिस्तान से जोड़कर देख रहा है, वही सिख समुदाय इन गिरफ़्तारियों से बहुत चिंतित ओर आहत है, लेकिन अब जैसे जैसे समय बीत रहा है, सच्चाई से परदा उठता हुआ नजर आ रहा है, इसी संदर्भ में पंजाब के एक गैंगस्टर सराज संधू ने अमृतसर में कत्ल किये गये, विपीन शर्मा के कत्ल को कबूल भी किया है और इसके पीछे की वजह, आपसी रंजिश को बताया गया है, जंहा सराज का इल्जाम है की विपीन शर्मा, सराज के अंकल के कत्ल में एक साजिशकर्ता था और इस कत्ल के लिये, विपीन शर्मा ने ही, हथियारों का बन्दोबशत किया था, सराज की इसी तथ्य के साथ, पंजाब पुलिस की उस दलील को भी खारिज कर दिया गया जो विपिन शर्मा की मौत को, सिख आंतकवाद से जोड़कर बता रही थी. http://m.hindustantimes.com/punjab/gangster-s-fb-post-claiming-he-killed-amritsar-hindu-leader-leaves-punjab-police-red-faced/story-wIIzS2xvSFD1YJyMGx9hNJ_amp.html

लेकिन, 2015 ओर 2017 में, पंजाब के भीतर, जालंधर ओर लुधियाना में, अलग अलग समय पर, दो आरएसएस कार्यकर्ताओ की हत्या को, पंजाब पुलिस अब भी, सिख आंतकवाद से जोड़कर देख रही है, जिसके संदर्भ में, पंजाब पुलिस द्वारा कई सिख नोजवानो को गिरफ्तार कर, अदालत से रिमांड पर लिया गया है, इसमे सबसे चर्चित मामला है इंग्लैंड में जन्मे, NRI जगतार सिंह जोहल उर्फ जग्गी का है, जो हाल ही में, पंजाब में अपनी शादी के सिलसिले में आये हुये थे, जंहा 18 अक्टूबर 2017 को इनकी शादी हुई थी वही नवंबर 2017 पहले हफ्ते में, पंजाब पुलिस द्वारा इनकी गिरफ्तारी की गई, लेकिन सबसे चोकाने वाला और अमानवीय,घटना तब चर्चा का विषय बनी जब जगतार सिंह जोहल के वकील ने ये सार्वजनिक किया की, जोहल को पंजाब पुलिस द्वारा बेहद अमानवीय तरीके से टार्चर किया गया जंहा लातो को विरोधी दिशा में खिंचा गया वही शरीर के नरम हिस्से, खासकर पेनिस पर भी बिजली का करंट देकर, जोहल से गुनाह कबूल करवाने की कोशिश की गई, व्यक्ति गत रूप से जो पंजाब पुलिस जो जानते है, वह इस तथ्य को बिना किसी शक के स्वीकार भी कर लेंगे लेकिन, जोहल का ब्रिटिश पास पोर्ट जो दिल्ली की UK एम्बेसी में जमा करवा दिया गया, उसकी पड़ताल से ये तो साबित हो गया की जोहल का कोई पाकिस्तानी कनेक्शन नही है, लेकिन आज जब जोहल की गिरफ्तारी को 25 दिन से ऊपर हो गये है, आज तक पुलिस जोहल के खिलाफ किसी भी तरह की चार्ज शीट को अदालत में जमा करवाने में नाकामयाब ही रही है लेकिन जोहल के NRI होने के कारण, जोहल की गिरफ्तारी और पंजाब पुलिस का तशदद, पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है, जंहा इंग्लैंड की संसद में ये मामला उठा वही इंग्लैंड की प्रधानमंत्री के साथ साथ दुनिया के कई देशों के राजनीतिक ने इस घटना पर अपनी चिंता जाहिर की है और किसी ना किसी तऱीके से ये मामला भारत सरकार के समक्ष उठाने का भरोसा भी दिया है.

http://www.bbc.com/news/uk-scotland-glasgow-west-41984339

https://youtu.be/FBJaBdwIwRU

अब ही हाल ही में हरियाणा पुलिस द्वारा किस तरह बस कंडक्टर अशोक को एक चार साल के छात्र की हत्या के दोष में, किस तरह प्रताड़ित किया गया और अंत में सीबीआई द्वारा अशोक को निर्दोषित घोषित किया गया, इसी तरह अगर जोहल भी, रिहा हो गया तो, पंजाब पुलिस ओर सरकार की सांख क्या रह जायेगी ? ओर जोहल की जिंदगी भी किस तरह बदल जायेगी, बिजली का करंट, शरीर के किस किस हिस्से को बेजान कर देगा, ये आप ओर मैं समझ सकते है. लेकिन, धर्म और पंथ, के बीच सिख समुदाय की छवि को अक्सर एक आंतकवाद के रूप में दिखाना, व्यक्तिगत रूप मुझे आहत भी करता है और डराता भी है, पंजाब के बाहर जिस तरह में ब्राह्मणवाद ओर मनुवाद पर, मैं बेझिझक अपनी राय रख सकता हूँ, इस तरह मैं पंजाब में नही बोल सकता क्योंकि, इसका मतलब धर्म का विरोध, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचना, से जोड़ा जा सकता है और मुझे किसी ना किसी तरीके से, पंजाब पुलिस एक आतंकवादी की छवि में दिखा सकती है, यही वजह है कि एक अमृतधारी सिख होने के नाते, मैं पंजाब जाने से डरता हूँ, ओर पंजाब में असुरक्षित भी महसूस करता हूँ, लेकिन हमारा मीडिया इस तथ्य को कभी नही दिखाएगा, की वास्तव में सिख आंतकवाद कहकर पंजाब के भीतर ही एक सिख को किस तरह डराया जाता है और उसमें असुरक्षा की भावना को पैदा किया जाता है. 

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