जीत हुई बीजेपी की लेकिन हारा कौन?

Posted by Rizavana Tabassum
December 19, 2017

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

फोटो साभार-भारतीय जनता पार्टी, फेसबुक पेज

गुजरात चुनाव के नतीजे आ गये हैं और लगातार छठवीं बार राज्य में भाजपा की सरकार बनने वाली है. लेकिन आपको क्या लगता है? ये कैसी जीत है? वो जीत जिसमें देश का संसद सत्र रोक दिया गया, वो जीत जिसमें खुद प्रधानमंत्री देश का सारा काम-काज छोड़कर एक राज्य में जाकर डेरा डाले हुए थे, वो जीत जिसे जिसे हासिल करने के लिए पाकिस्तान तक का नाम आया.

इस जीत को किसकी जीत बतानी चाहिए, भाजपा की जीत या नरेन्द्र मोदी की? लगता तो कुछ ऐसा ही है कि नरेन्द्र मोदी के बिना शायद भाजपा इसे कभी नहीं जीत पाती. अब भले ही भाजपा जीत गई हो लेकिन इसमें हारा कौन है? क्या राहुल गांधी हारे हैं? क्या हार्दिक पटेल की हार हुई है या कन्हैया कुमार की हार हुई है? या ये उस बेचारी ईवीएम की हार है जिसे पिछले कई सालों, तकरीबन हर चुनाव में भला बुरा सुनना पड़ रहा है?

कहीं ना कहीं कांग्रेस की ये हार बीजेपी की जीत पर भारी पड़ रही है जिस तरह से पिछले कई महीने से राहुल गाँधी गुजरात में रैलियां कर रहे थे, मंदिर में जाकर माथा टेक रहे थे. यहाँ तक की उन्होंने ना सिर्फ हिन्दू होने का सबूत दिया बल्कि वो जनेऊधारी हिन्दू के रूप में भी लोगों के सामने आये. ऐसा लगता है कि कांग्रेस को ये एहसास हो गया कि जब तक हिन्दू नाम की चटुकारिता नहीं होगी शायद जीत नहीं मिलेगी.

क्या सिर्फ हिन्दू होने पर ही जीत मिल सकती है? अगर ऐसा है तो आने वाला समय यह देश के लिए और लिए अल्पसंख्यक मुसलमानों के लिए डर भयावह होने वाला है, वो वक्त यकीन दिलाएगा कि भारत में उनके लिए कोई जगह नहीं है .  अगर ऐसा हुआ तो उनकी क्या स्थिति होगी? इसलिए देश के लिए इस देश के मुसलमानों के लिए, अल्पसंख्यक के लिए अगर धर्मनिरपेक्ष की बात कोई कर रहा है तो उन्हें चाहिए कि वो अपनी बात को मजबूती से पेश करें, जनता को यकीन दिलाएं. भले ही उनकी हार हो लेकिन हार से निराश होने से बेहतर है कि हम एक शानदार देश की जानदार भविष्य की ओर अग्रसर होंगे.

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.