जीवन का सच

Posted by Samar Makwana
December 5, 2017

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हम जीवन के एक रंगमंच खड़े है यहाँ सबको अपना किरदार अदा करना है। हम सब वो कठपुतलियां है जिसको स्वयं भगवान खुद चला रहा है। हम तो बस वही करते है जो उसकी ईच्छा होती है। मै हताश और निराश, कुंठा में बैठा ये सोच रहा था क्या काम है इस जीवन का इसमें दुःख दर्द के अलावा कुछ नहीं है हर जगह से हारने के बाद में अब थक चूका हूँ मुझे अब इस जीवन को ख़त्म कर देना चाहिए बस यही सोचकर घर से रात की पहली पहर में चुपचाप सबको अलविदा कह कर चल दिया विशाल सागर की लहरों पर अपने आप को लहरों में खुद को समेटने के लिए तभी एक आवाज़ सुनाई दी एक बुजुर्ग वहाँ खड़ा हो मुझे आवाज लगा रहा था तुम्हे मारना है तो यहाँ क्यों मर रहे हो यहाँ तो तुम्हे मौत मुश्किल से मिलेगी जाओ समुन्द्र के पूर्व किनारे-किनारे चल कर चार कोस दूर पर गहरी खाई में कूद कर जान दे देना मुझे उस बुजुर्ग की बात सही लगी मैने पूर्व दिशा की और मुँह कर जाने लगा पर मेरे मन में एक प्रश्न उठा ये बुजुर्ग इतनी रात में यहाँ क्या कर रहा है ये प्रश्न करने के लिए मैने जैसे ही पीछे पलट कर देखा तो वो बुजुर्ग व्यक्ति वहाँ नहीं थे में पहले तो डर गया पर जो खुद मौत को गले लगाना चाहता है उसे किसी से कोई भय नहीं रहता फिर में गहरी काली रात में समुन्द्र की लहरें जो किनारों को छू कर आ जा रही थी पर तेज कदमो से चलने लगा आधा सफर तय करने के बाद में एक पेड़ के नीचे विश्राम करने के लिए रुका उस पेड़ पर छोटी चिड़िया का घोसला बना हुवा था जो शायद तूफान के कारण टूटकर नीचे गिर गया था तभी मुझे छोटी चिड़िया के जोड़े की बातचीत मेरे कानों में सुनाई दी मैने अपना ध्यान उनकी बात पर लगाया तो वो आपस में बात कर कह रहे थे ये संकट की घड़ी भी टल जायगी क्या हुवा जो हमारे कुछ अंडों को सांप ने खा लिया तो और ऊपर से तूफान में घर भी टूट गया पर हम तो सही सलामत है हमें इसी में भगवान का शुक्रिया कहना चाहिए हम फिर से कड़ी मेहनत कर अपना घर किसी और जगह बना लेंगे ताकि हम फिर इस संकट में न पड़े आने वाला नया दिन हमें खुशियाँ बाटने ही आ रहा है क्यों की अभी दुःख तो आगे सुख है। उस चिड़िया के जोड़े की बात ने मेरे सोच को हिला दिया पर मैने अपना मन बना लिया था जो फिर से में आगे बढ़ा पर उन दोनो की वो बाते मेरे दिमाग से बाहर नहीं हो पा रही थी में चलते जा रहा था और सोच रहा था कि मैने इस जीवन में क्या पाया और क्या खोया है। में जब पैदा हुवा जब मेरे कुछ नहीं था मुझे जो मिला मेरे माता-पिता से मिला में बड़ा हुवा मेने मौज मस्ती में सारी पेतृक सम्पति खर्च कर डाली जितना कमाया नहीं उससे ज्यादा खर्च करता रहा परिवार का भरण- पोषण भी अब ढीक तरीके से ना कर पाने के कारण मेरे मन को निराशा ने घेर लिया और बहुत दिनों से इसी उलझन में उलझता रहा और आज मैने ये अंतिम फैसला ले ही लिया की आज इस जीवन को समाप्त करना है। खुद से ये बाते करते हुवे में आगे बढ़ रहा था तभी पो फटी सूरज देवता के आने से पहले की लालिमा दिखाई देने लगी पता ही नहीं चला की कब सुबह हो गई तभी मेरी नज़र एक पेड़ पर एक चिड़िया के जोड़े पर पड़ी शायद वो वही छोटी चिड़िया का जोड़ा था जो रात में पेड़ पर था मैं उनकी बात को सुनने लगा वो आपस में बात कर रहे थे जो हुवा उसे भूल कर आज भगवान की कृपा से हमने हमारा नया घर बनाया है जो अंडे बच गए थे उनमें से दो नन्हे-नन्हे चूजे बहार निकल आये थे। चारो तरफ पक्षियों की आवाज मन को सुकून दे रही थी एक डरावनी रात का अंत हो गया था एक सुनहरी सुबह का आगमन हो रहा था और में इसी उधेर-बुन में था क्या किया जाय तभी अचानक अलार्म की घंटी बजने लगी में अपनी चारपाई से उठा और देखा की सुबह के सात बज चुके है। मुझे इस सपने ने अंतरआत्मा तक को हिला कर रख दिया मुझे मेरी सारी ज़िन्दगी में गई गलतियां याद आने लगी की किस तरह से मैने मेरे सुखी जीवन को दुखो की खाई में डाला है, मैने बुजुर्गो की सेवा के अलावा पूण्य का कोई काम नहीं किया होगा पर वक़्त रूपी बुजुर्ग की सलाह से आज मेरा जीवन बच पाया है। मुझे ये नया जीवन मिला है मुझे इस जीवन को फिर से खुशियो से भरना है इसी संकल्प के साथ में भगवान का धन्यवाद किया। मुझे आज बहुत देरी हो चूकी थी सारे सुबह के दैनिक कार्यो से निर्वत होकर भगवान से प्रार्थना की है प्रभु आप की कृपा हमेशा बनाये रखना अच्छा-बुरा जो हो वो आप जानो कहकर दफ्तर की और चल दिया। लेखक :- समर मकवाना
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