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दिल्ली में पटाखों पर रोक

Posted by Manish Abhishek
December 4, 2017

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तो दिल्ली में पटाखों पर रोक लगी। और भक्तों के पेट मे कीड़े उलबुलाने लगे। उन्हें तमाम अन्य मजहबो के त्योहारो की याद आ गयी। विक्टिम कार्ड खेलना शुरू। उन्हें रोको तो जानू… उन्हें रोको तो जानु। अबे शर्म करो मूर्खो। मेरे पापा ने तो बचपन मे ही मेरे पटाखों पर बैन लगा दिया था। केजरीवाल ने तो बहुत देर बाद किया है। दिल्ली की हवा जब गैस चैम्बर बन गयी तब। अरे हिन्दू संस्कृति और सभ्यता के हिमायतियों, क्या ये पटाखे हमारी सभ्यता और संस्कृति का हिस्सा है? क्या ऐसी ही दीवाली मनी थी अयोध्या में जब राम लंका से लौटे थे? ऐसी दीवाली मनती ना तो सोचो वानर सेना का क्या हाल हुआ होता। यह दीप जलाने का पर्व है। शुद्ध सरसो के तेल के दीप। जिनकी टिमटिमाती रोशनी विदेशी चकमकती बल्बों के सामने भले न टिके लेकिन उनके कई औषधीय गुण भी है। मैंने तो बहुत पहले पटाखा त्याग दिया था। मेरे परिवार में भी कोई इस पटाखे के समर्थन में नही। एक स्वागतयोग्य फैसला।

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