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देर रात पोस्ट करने और कभी किसी पोस्ट को डिलीट करने के पीछे का सत्य ! पढ़ना जरूर

Posted by Abhijeet Thakur
December 7, 2017

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

“मीडिया में इमेज मैनेजमेंट करने की बजाय जायज बातों पर ध्यान देना हानिकारक हो सकता है क्या ?”

जी हाँ , मैं देर रात सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखता हूँ । मेरे पास इसके लिये वाजिब वजह है लेकिन मेरे आलोचकों और मेरे प्रति घृणा से ग्रसित लोगों के पास प्रचारित करने हेतु कई तुच्छ तर्क हैं जो उनको उनके पालन पोषण और पारिवारिक पृष्ठभूमि के अनुसार ज्ञान स्वरूप मिले हैं । खैर , परवरिश के दोष में मेरी क्या भूमिका !
मैं सत्य को व्यक्त करता हूँ , वस्तुस्थिति को जस का तस लिख डालता हूँ …. गधे को गधा बोलता हूँ और टुच्चे को टुच्चा । लेकिन इसके भी कई नुकसान हैं ! लोग इतने फुरसतमंद हैं कि अपने अपने विचार बना कर मेरे खिलाफ अकघोषित फतवा तक जारी कर देते हैं । पहले नशे में लिखना और फिर डिलीट करने जैसी बातें चटकारे के साथ प्रसारित करते हैं । आरोप लगते हैं कि पत्रकार नशे की हालत में लिख देता है और होशो हवास में नहीं होता । सच आप भी जानिये ।
रात को मन शांत होता है, विचार आते हैं । दिन भर की भाग दौड़ के बाद यही एक समय निजी होता है । विश्लेषणात्मक क्षमता बढ़ जाती है और कुछ लिख देने की इच्छा जागृत हो जाती है ।
अगर मैं होश में नहीं होता तो कोई गलत बात क्यों नहीं लिखता ? और कोई स्पेलिंग मिस्टेक भी नहीं होती ! आप तो होश में भी चार हिन्दी की पंक्तियाँ शुद्ध नहीं लिख पाते , फिर भी पत्रकार कहलाते हो । सच कहा ना ! बस इसलिये बुरा हूँ मैं ।
डिलीट करने के पीछे का सत्य ये है कि कटु सत्य लिख डालता हूँ तो कई घनिष्ठों की शिफारिश और कॉल-संदेश आ जाते हैं कि इस पोस्ट को हटा दो भाई , इसमें फलाँ तुच्छ व्यक्ति की पोल पट्टी खुलती दिख रही है और वो सीधे तो कुछ बोल नहीं सकता लेकिन निजी रूप से बेहद आहत है । कारण ये है कि वो नकली है और मीडिया का दुकानदार है ।
मैं भावुक सा प्राणी ,उस ‘फलाँ’ की बेचारगी पर रहम खा कर उस कलई खोलते व्यंगात्मक पोस्ट को डिलीट क्या करता हूँ , जनता और तथाकथित बुद्धिजीवी मूर्खों के बीच एक अफ़वाह के साथ उस नकली की वापसी होती है । मेरे दयाभाव को मेरी कमजोरी बताते हुए वो दुष्प्रचार में पूरी निष्ठा से जुट जाते हैं , फुर्सत में जो हैं !
वो कहता है कि नशे में लिख दिया था और सुबह होते ही डिलीट कर दिया क्योंकि उसकी फट गई ।
अरे मूर्खता की बदहवासी में मशगूल मेरे मिट्टी के शेर, तू अज्ञानता से इस कदर परिपूर्ण है कि तुझे रहमत और ज़हमत का फर्क भी मालूम नहीं । तू क्या मेरे ख़िलाफ़ अफवाहें फैलाने निकलेगा ?
बात भरोसे की है, जो आप पर टिकी है । आप सब ज्ञानी हैं, अनुभवी हैं , और पारखी भी हैं । मैं तो महज 3 साल और छः महीने पुराना पत्रकार मात्र हूँ , आपने सब देखा , जाना , परखा और भुगता है । कई बार आपकी आवाज बना हूँ , अच्छा काम किया है, नतीजे दिये हैं और व्यवहार कुशलता में भी कभी पीछे नहीं रहा… किसी भी पैमाने पर मुझे खुद को साबित करने की आवश्यकता नहीं फिर भी स्पष्टता मेरा सिद्धांत है और इसलिये ये सब लिख रहा हूँ , ताकि आप सबका विश्वाश बना रहे ।
निर्णय अपने बौद्धिक क्षमता के अनुकूल ही करेंगे, आशा है ।।
मेरा उद्देश्य और संकल्प दोनो स्पष्ट है, सत्य बोलता रहूँगा और छल उजागर भी करता रहूँगा । तमाम प्रतिरोध के बावजूद भी प्रमुख सामाजिक , राजनीतिक, व्यावसायिक, प्रशाशनिक और आम जनता से मुझे सदैव व्यापक समर्थन और सहयोग मिलता रहा है जो मेरे कर्तव्यनिष्ठता की वजह से ही है । आप हर तथ्य और मौके को धन से नहीं तौल सकते ।
मेरे चरित्र हरण से पहले मेरे विरोधियों ने शोध में थोड़ी कमी छोड़ दी , और अपने दशक पुराने अनुभव को मेरे चंद वर्षों पुराने प्रयास के समक्ष भी सहेज न सकें । शायद यही कारण है कि आज भी सीधी बहस, चर्चा, तर्क-वितर्क या ज्ञान परीक्षण से भयभीत वो मेरे विरुद्ध तुच्छ राजनीति कर मेरी छवि को धूमिल करने का विफल प्रयास मात्र ही करते दिखते हैं ।
मूर्खता की पराकाष्ठा इस हद तक कि सोशल मीडिया पर फेक एकाउंट बना कर मेरी महिला मित्र को मेरे विरुद्ध भड़काने और ग़लतफ़हमी पैदा करने का भी विफल प्रयास कर डालते हैं ! संस्कारों से नीच व निर्लज्ज होना इसे ही कहते हैं ।
खैर , एक कर्तव्यनिष्ठ पत्रकार और महादेव का भक्त होने के नाते मेरे विचार और मेरी सोच आज भी भोले नाथ के सर्वेक्षण और निर्णय को समर्पित है ।
पाप, छल, षड्यंत्र, झूठ , द्वेष, घमंड और नीचता का विनाश निश्चित है । मैं एक बार फिर सब कुछ महादेव को साक्षी मान कर उन्हीं पर छोड़ता हूँ ।
हर हर महादेव !!

अभिजीत ठाकुर

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