निजी क्षेत्र में आरक्षण की शुरुवात

Posted by Rohit Verma
December 5, 2017

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भाजपा के समर्थन से बनी बिहार की सरकार ने आज एक ऐतिहासिक(?) फैसला बहुत ही शांत तरीके से ले लिया है।हजार की जगह 10 हजार मिलता था और आरक्षण के कारण लतियाये गए 80% वाले कम से कम कांट्रेक्ट वाली नौकरी पा जाते थे मगर ये भी सरकार को देखा नही गया औऱ इसमें भी आरक्षण लागू करके अन्य राज्यों के लिए रास्ता बना दिया गया..

अब सरकार जिन निजी ह्यूमन रिसोर्स कम्पनियों से लेबर या कांट्रेक्ट एम्प्लाई लेगी उन कंपनियों को मैनपावर सोर्सिंग में आरक्षण के नियमो को पालन करना पड़ेगा। इसका दूसरा मतलब ये है कि 40 हजार की नौकरी में तो जनरल कैटेगरी वाला 80% पा के भी छट जाएगा क्योंकि 30% वाले को आरक्षण के माध्यम से नौकरी दी जाएगी। अब उसके बाद कांट्रेक्ट की नौकरियां थी जिसमें 40

सामान्य वर्ग की एकमात्र उम्मीद निजी क्षेत्र है क्योंकि प्राइवेट कंपनी वाला टैलेंट और प्रोडक्टिविटी देखकर नौकरी देगा,मगर अब यहां भी नौकरियां जबरिया आरक्षण के तहत दी जाएंगी। गेट खोल दिया गया है ठीक उसी प्रकार जैसे श्री भीमराव अम्बेडकर ने 10 साल के लिए आरक्षण दे के गेट खोला था और आज प्रतिभाओ के दमन और देश के विकास को अवरुद्ध करने का टूल बन गया वो निर्णय। कल सरकार यह नियम ले आएगी की उसी कंपनी को सरकारी कांट्रेक्ट मिलेगा जो आरक्षण के सरकारी नियम का पालन अपने फैक्ट्री में करेगी। फिर MNC से शुरू करके लिमिटेड,प्राइवेट लिमिटेड में भी आरक्षण इसके बाद यदि आप व्यापार हेतु GST लेने जाएंगे तो बिना आरक्षण के नियम का पालन किये बिना नही मिलेगा..शुरुवात हो गई है..अब प्रश्न ये है कि सामान्य वर्ग कहाँ जाए?? उसके रोजी रोटी के सभी साधन आप धीरे धीरे छीन रहे हैं। अब बेचारा दुकान खोलेगा ठेला लगाएगा तो भी उसे अपनी मर्जी से लेबर रखने की आजादी नही आरक्षण के अनुसार रखे चाहे भले ही फेल कैंडिडेट हो??
तो सरकार एक अध्यादेश ले आये सामान्य वर्ग की नागरिकता खत्म करके उनके वोटिंग राइट्स छीन लिए जाए। वैसे भी प्रतिभाओं की हत्या में भारत की रैंकिंग टाप पर होगी…एक प्रश्न ये है की देश में सेवाओं की गुणवत्ता का क्या होगा अगर बाध्यकारी तरीक़े से सेलेक्शन किया जाएगा???
मेरा उद्देश्य यहां भाजपा,कांग्रेस,सपा या किसी वर्ग विशेष का विरोध करना नही मगर सामान्य वर्ग को ये सोचना होगा कि आप की पीढ़ी तो जी ले रही है मगर ये राजनेता और तंत्र आप के बच्चे की जीने की आजादी भी छीन रहे है। क्या इलाज होगा मैं नही जानता मगर विश्व का इतिहास क्रांतियों से भरा है….

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