“निरंकुश हादसे “

Posted by Naresndra Nath Tripathy
December 5, 2017

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जीवन में रफ्तार और रफ्तार में जीवन बेहद संजीदा विषय है सड़क सुरक्षा मानकों की अनदेखी __________

                  सड़क हादसों में कालकलवित मौतों का मौखिक और  व्यवहारिक आंकड़ा कुछ ऐसे समझिए शायद ही कोई ऐसा हो जिसका सगा संबंधी या फिर नात-बात या फिर परचित और दूर -दराज से जानने वाला हादसे का शिकार न हुआ हो , भारत में सड़क घटनाओं का वार्षिक आंकड़ा लगभग पांच लाख और डेढ़ लाख से अधिक मौतें लाखों का अपाहिज होना गहरी चिंता का विषय हैं ।”एक तो नीम ऊपर से करैला” मतलब या तो सड़कों पर साइन बोर्ड ही नहीं हैं हैं भी तो गलत जगहों पर इबारतें इतनी छोटी कि दूर से पढ़ना मुश्किल ऊपर से भारतीय चालक पंजीयन की प्रक्रिया अधिकांश दुर्घटनाओं में देखा यह जाता है कि चालक नशे में था क्या ?या फिर गतिसीमा बहुत अधिक रही होगी !कोई यह ध्यान क्यों नही देता कि चालक की दृष्टि वाहन चलाने के मानक पर खरी है या नही कहीं उसे निकट दृष्टि दोष या दूर दृष्टि तो नही है ।रही बात रफ्तार और नशे की तो वह महत्वपूर्ण उत्तरदायी कारक है , बंदूक की जानलेवा गोली में भी मौत की वाहक रफ्तार ही होती है और नशे में गाड़ी चलाना तो मानो संवैधानिक अधिकार ही सिद्ध हो रहा है साहब सुनामी से भी ज्यादा सड़क हादसे मौत का तांडव कर रहे हैं ।फ्लाईओवर निरन्तर बढ़ रहे हैं  पर सड़क सुरक्षा घट रही है ।धुंध मौसमी है लेकिन जीवन सदाबहार है उच्चतम् तकनीक के दौर में हम कितने कारगर हैं?रोड इंजीनियरिंग अकुशलता जानें कितने बच्चों को सर से पिता की छाया माताओं की गोद और पत्नियों का सुहाग और बहनों के भाइयों को कालकलवित कर रही है ।निश्चित रूप से जनजागरूकता और शासकीय/सरकारी  सक्रियता जरूरी है गुलिस्ता की कुशलता के लिए _________
                                    नरेन्द्र नाथ त्रिपाठी

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