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निर्लज्ज भारतीय समाज

Posted by Rajan Kishan
December 6, 2017

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बहुत क्रोध में हूँ

समाज की खोखली
मर्यादाओं को तोडकर लिख रहा हूँ
अतएव आज मुझसे सभ्यता या शालीनता की उम्मीद न करें

इस फोटो में जिसे भी इस महिला के स्तनों पर नजर गाडनी है गाड ले क्योंकि इससे ज्यादा मैं लंपट पुरुष समाज से कोई उम्मीद भी नहीं रखता हूँ

नारी को संतान पैदा करने का बरतन मात्र समझने वाले लोगों के समाज में हैं हम …

जहां प्रसव के बाद माँ से ज्यादा प्यार उस पर लुटाया जाता है जो पैदा हुआ है और अगर गलती से बेटी ने जन्म ले लिया है तो दोनों में से कोई भी न सेवा का पात्र है और न प्यार का

मेरी नजरों में पहली दोषी स्वयं प्रकृति है
जिसने संभोग के समय मिलने वाले आनन्द को पुरूष व नारी दोनों में बराबर बांटा किन्तु प्रसव पीड़ा का दर्द मात्र नारी को दिया ….

सृष्टि रचयिता की यह भूल कतई क्षमा योग्य नहीं है

प्रसव के एक दिन बाद नवजात को अपना बोल उस पर आधिपत्य जमाने वाले और प्रसूता को अस्पताल में अकेला छोड़ भाग जाने वाले लोगों का महान देश है ये

ये मानुषी छिल्लर के नाम का गीत गाने वाला देश

जहां सौमाया जैसी बेटियां

अपने घायल जिस्म लिए पडी हैं अस्पताल के बिस्तरों में ये उम्मीद लिए कि वो शख्स आएगा उसे संभालने जिसने शादी के बाद हर दिन उसके शरीर का सुख भोगा है जिसने किसी रात को बेकार नहीं जाने दिया

मेरी दृष्टि में ऐसे लोगों को इतना भी हक नहीं दिया जाना चाहिए कि वे देख भी पाएं नारी को

नारी को स्पर्श करने का हक उनकी कल्पनाओं से भी मिटा दिया जाए

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