पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में वैज्ञानिक (पर्यावरण)

Posted by ecm New Delhi
December 12, 2017

Self-Published

विषयांतर्गत लेख है कि आज पर्यावरण संरक्षण के लिए हमारे देश के साथ-साथ समूचा विश्‍व चिंतित है किंतु सरकार बेखबर है। इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के द्वारा लगभग एक लाख पर्यावरण विज्ञान में उच्‍चशिक्षित बेरोजगारों के साथ कई वर्षों से अन्‍याय किया जाता रहा है। हमारे देश के 100 विश्‍वविद्यालयों में लगभग 35 वर्षों से पर्यावरण विज्ञान में स्‍नातक, स्‍नातकोत्‍तर एवं पीएच.डी आदि की डिग्री हो रही है लेकिन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वैज्ञानिक (पर्यावरण) एवं अन्‍य तकनीकी पदों के पुराने भर्ती नियम और भाई-भतीजावाद के चलते इन पदों पर पर्यावरण विज्ञान में उच्‍चशिक्षित बेरोजगारों को रोजगार नहीं दिया जाता है। उदाहरण नं. (1) अनुसंधान सहायक (पर्यावरण) (Research Assistant (Environment)) पद की भर्ती के लिए (Advertised vide cat No. NR-B of Advt.SSC/HQ/1/2009) निकाला गया था जिसमें शैक्षणिक योग्‍यता के रूप में (Master’s Degree in any branch of Science/Anthropology or Bachelor’s degree in Engg./Architecture from a recognized University or equivalent.) जबकि पद पर्यावरण का और शैक्षणिक योग्‍यता के रूप में पर्यावरण विज्ञान में, स्‍नातकोत्‍तर डिग्री को शैक्षणिक योग्‍यता के रूप में नहीं मांगा गया। और इस पद पर अन्‍य विषय के आवेदकों का चयन किया गया जो कि शैक्षणिक योग्‍यता ही पूरी नहीं करते हैं इसकी जांच होनी चाहिए।

       उदाहरण नं. (2) अनुसंधान अधिकारी (पर्यावरण) Research Officer (Environment) Grade-II के पद की भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्‍यता के रूप में (Master’s Degree in any branch of Science or Bachlor’s degree in Engg. From a recognized University or equivalent.) (RTI से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार) पद पर्यावरण का और शैक्षणिक योग्‍यता के रूप में पर्यावरण विज्ञान में, स्‍नातकोत्‍तर डिग्री को शैक्षणिक योग्‍यता के रूप नहीं मांगा जाता है। और इस पद पर अन्‍य विषय के आवेदकों का चयन किया जाता है। उदाहरण नं. (3) वैज्ञानिक (पर्यावरण), Scientist (Environment) के पद की भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्‍यता के रूप में (Master degree in any one of the streams viz.Physic, Chemistry, Math, Botany, Zoology, Agriculture, Chemical Engineering, Sociology, Applied Geology, Wild Life, Microbiology, Mining Engineering, Biochemistry, Marine Biology, Geography and Fisheries. Or Experience: – (Working experience in the field of Environmental Pollution Control or Environmental Impact Assessment or Management of Hazardous Substances or Management of Bio-diversity or Conservation and Survey). (RTI से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार) पद पर्यावरण का और शैक्षणिक योग्‍यता के रूप में पर्यावरण विज्ञान में स्‍नातकोत्‍तर एवं पीएच.डी आदि डिग्री को शैक्षणिक योगयता के रूप में नहीं मांगा जाता है। जबकि अनुभव पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में होना चाहिए जबकि पद वैज्ञानिक (पर्यावरण) का है तो शैक्षणिक योग्‍यता के रूप में अन्‍य विषय क्‍यों मांगे जाते हैं? और अनुभव पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में क्‍यों मांगे जाते हैं इसकी जांच होनी चाहिए।

       पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत संस्‍थाएं जैसे – केन्‍द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भारतीय वन अनुसंधान, भारतीय वन प्रबंधन संस्‍थान, जी.बी. पंत हिमालियन पर्यावरण संस्‍था, भारतीय वन्‍यजीव संस्‍था, भारतीय वन सर्वेक्षण संस्‍था, भारतीय वनस्‍पति सर्वेक्षण संस्‍था, भारतीय जन्‍तु सर्वेक्षण संस्‍था, पर्यावरण शिक्षा संस्‍थान आदि विभागों में वैज्ञानिक (पर्यावरण), पर्यावरण विशेषज्ञों, तकनीकी अधिकारी (पर्यावरण), अनुसंधान अधिकारी (पर्यावरण), पर्यावरण प्रबंधक, अनुसंधान सहायक आदि कई पद हैं लेकिन सरकार के वैज्ञानिक (पर्यावरण) एवं अन्‍य तकनीकी पदों के पुराने भर्ती नियम और भाई-भतीजावाद के चलते इन पदों पर पर्यावरण विज्ञान में उच्‍चशिक्षित बेरोजगारों के रोजगार नहीं दिया जाता है इन पदों पर भर्ती के लिए शैक्षणिक योगयता के रूप में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, वनस्‍पति विज्ञान, जन्‍तुविज्ञान, कृषि विज्ञान, भू-गर्भ शास्‍त्र,/भूजल विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, आदि विषयों में स्‍नातकोत्‍तर मांगा जाता हैं। ,संलग्‍न1) जब इन पदों की विज्ञप्ति निकाली जाती है तो शैक्षणिक योग्‍यता के रूप में विज्ञप्ति जिसमें पर्यावरण विज्ञान डिग्री का उल्‍लेख नहीं किया गया है और यदि पर्यावरण विज्ञान विषय को रखा भी जाता है तो उससे पहले कई अन्‍य विषय रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, जन्‍तु विज्ञान, वनस्‍पति विज्ञान, भू-गर्भ शास्‍त्र,/ भूजल विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, आदि विषयों को शैक्षणिक योग्‍यता के रूप में मांगा जाता है और पर्यावरण विज्ञान में उच्‍चशिक्षित बेरोजगार अपने आप को ठगा सा महसूस करता है। हमारे देश में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय स्‍वतंत्र रूप से काम कर रहा है पर वैज्ञानिक (पर्यावरण) का चयन यू.पी.एस.सी. (UPSC) द्वारा नहीं किया जाता है जबकि भू-गर्भ शास्‍त्र, (Geology) वैज्ञानिक, चयन परीक्षा अलग से ली जाती हैं। और केवल भू-गर्भ शास्‍त्र (Geology)/भूजल विज्ञान विषय को ही शैक्षणिक योग्‍यता मांगा जाता है। जब‍कि पर्यावरण संरक्षण, पर्यावरण अनुसंधान आदि के क्षेत्र में सरकार कितनी चिंतित है इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के विभिन्‍न विभागों तथा मंत्रालय से संबंधित विभिन्‍न संस्‍थाओं में कुल स्‍वीकृत पदों के 1 प्रतिशत पद पर भी पर्यावरण विज्ञान में उच्‍चशिक्षित बेराजगारों को रोजगार के अवसर प्रदान नहीं किए जाते हैं। आज हमारे देश में हजारों पर्यावरण विज्ञान में उच्‍चशिक्षित बेरोजगार रोजगार के इंतजार में सरकारी नौकरी के लिए निर्धारित आयु के आखिरी पड़ाव पर तथा हजारों उच्‍चशिक्षित बेरोजगार की आयु निकल गई।

       अत: माननीय महोदय जी से विनम्र निवेदन है कि पर्यावरण विज्ञान में उच्‍चशिक्षित बेरोजगारों को सरकारी सेवा के अवसर प्रदान करने के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वैज्ञानिक (पर्यावरण) एवं अन्‍य तकनीकी पदों के वर्षों पुराने भर्ती नियम में संशोधन कार पर्यावरण संरक्षण, पर्यावरण अनुसंधान आदि के क्षेत्र में स्‍वीकृत पदों पर केवल पर्यावरण विज्ञान में उच्‍चशिक्षित बेरोजगारों को अवसर प्रदान करें। पर्यावरण वैज्ञानिकों का चयन यू.पी.एस.सी. (UPSC) द्वारा पर्यावरण वैज्ञानिक चयन परीक्षा के द्वारा किया जाए। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अन्‍य पद पर्यावरण विशेषज्ञों, तकनीकी अधिकारी (पर्यावरण), अनुसंधान अधिकारी (पर्यावरण), पर्यावरण प्रबंधक, अनुसंधान सहायक (पर्यावरण), सहायक प्राध्‍यापक/प्राध्‍यापक, पदों पर भी पर्यावरण विज्ञान में उच्‍चशिक्षित बेरोजगारों को अवसर प्रदान करने की कृपा करें।

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.