प्रदेश के लिए गौरव की बात, नारी सुरक्षा सप्ताह की हुई शुरुआत

Posted by Prateek Pandey
December 8, 2017

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उत्तर प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध पर लगाम लगाने के लिए यूपी पुलिस ने दिसम्बर माह के पहले सप्ताह में नारी सुरक्षा एवं जागरूकता अभियान चलाया हैं। इसके तहत यूपी पुलिस के अधिकारी चार दिसंबर से दस दिसंबर तक सूबे के सभी जिलों में स्कूलों, कालेजों में जाकर नारी सुरक्षा से संबंधित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे हैं एवं छात्राओं को महिला अपराध से जुड़े कानूनी प्राविधान, पुलिस द्वारा महिला सुरक्षा के लिए चलाई जा रही सेवाओं,इत्यादि के संबंध में जानाकारी दी जा रही है। महिलाओं और छात्राओं को सशक्त करने के लिए यूपी पुलिस हर एक जिले में  डायल-100, वीमेन पॉवर लाइन-1090, एंटी रोमियो स्क्वायड, ट्विटर सेवा जैसी सेवायों के बारे में भी बता रहीं हैं। उत्तर प्रदेश के डीजीपी श्री सुलखान सिंह का नारी सुरक्षा सप्ताह के संबंध में कहना है कि “नारी सुरक्षा सप्ताह मनाना पुलिस के लिए गर्व की बात है, क्योंकि मौजूदा वक्त में यूपी पुलिस की ओर से नारी सुरक्षा के लिए कई योजनाएं बनाई गई है, लेकिन इसकी जानकारी न होने के चलते अक्सर महिलाएं अपराध का शिकार हो जाती हैं। इस जागरूकता अभियान के तहत पूरे सूबे में छात्राओं को उनके अधिकारों से संबंधित जानाकरी दी जायेगी एवं उन्हें यह भी बताया जाएगा की मुश्किल स्थिति का सामना कैसे करें।”

क्या एनसीआरबी के आकड़ों के आने के बाद बनाई गई इस कार्यक्रम की योजना ?

राष्ट्रीय अपराध अनुसंधान ब्यूरो (एनसीआरबी) ने जब 30 नवम्बर 2016 को भारत में अपराधों के आकंड़े जारी किए, तो उत्तर प्रदेश का एक दुखदायी पक्ष उभरकर सामने आया। उत्तर प्रदेश में महिलाओं के प्रति हुए अपराधों की संख्या बहुत हद तक बढ़ गई। बलात्कार के मामले में देश भर में उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा। एनसीआरबी के मुताबिक भारत में महिलाओं के साथ 2016 में बलात्कार के कुल 38, 947 मामले दर्ज हुए और अकेले उत्तर प्रदेश में ही 4816 मामले दर्ज हुए। लेकिन इस संबंध में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्यक्रम तो पहले से ही तय था।

क्या नारी सप्ताह से आएगी अपराध में कमी?

उत्तर प्रदेश पुलिस के यह सराहनीय कदम प्रशंसा के योग्य हैं और इसमें कोई दोराय नहीं है। यूपी पुलिस जहां एक ओर महिलाओं को उनको दिए गए अधिकारों के बारे में जागरूक कर रही हैं वहीं दूसरी ओर संकट के समय में अपना बचाव करने  के लिए आत्मरक्षा एवं सुरक्षा के गुण भी सीखा रही है जिससे महिलाएं और भी ज्यादा सशक्त एवम् सक्षम हो जाएंगी। परन्तु क्या सिर्फ इन्हीं प्रयासों से हमारे देश में महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों में गिरावट आएगी? नहीं। नारी को जागरूक एवम् सशक्त करने के साथ साथ जब तक नारी को समाजिक रूप से पुरुष से बराबरी नहीं मिलेगी तब तक महिला अपराध में कमी नहीं आयेगी। जब तक समाज में महिलाओं को उनका पूरा हक नहीं मिलेगा, तब तक महिलाओं के प्रति अपराध कम नहीं किया जा सकेगा।

महिला अपराधों के लंबित पड़े मामलों का क्या?

एक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 में हुए बलात्कार के मामलों में केवल 14 प्रतिशत मामलों की ही सुनवाई हो पाई है और 86 प्रतिशत मामले अपूर्ण रहें है। अपराध करके आरोपी या तो बरी हो जाते हैं या फिर कभी पकड़ में ही नहीं आते हैं। नारी सप्ताह चलाने से शायद नारी सशक्त जरूर हो जाए परन्तु बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में उसको न्याय दिलवाना, यह भी सरकार का ही काम है। न्यायालयों में लंबित पड़े मामलों में महिलाओं को न्याय कब तक मिलेगा? और क्या समाज अपनी कोई ऐसी न्याय व्यवस्था बनाएगा, जिसमें महिलाएं सुरक्षित और सम्मानित हों?

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