फिर एक काल दिवस : बाबरी मस्जिद के नाम पर भारत की सभ्यता और ऐकता पर संकट

Posted by Divya Antil
December 19, 2017

Self-Published

बंधे होते हुए एक ही धागे से,

जुड़े होते हुए एक ही मांझे से

न जाने क्यों इंसान को बांटा जाता है

धर्म के बंधन में।।

समाज को लोगों का समूह कहकर परिभाषित किया जाता है और लोगों को इसकी ईकाई माना जाता है।यदि ऐसा है तो हर व्यक्ति समाज में बराबर है पर क्या वास्तव में ऐसा है।क्या भेदभाव करना चाहे जाति के नाम या धर्म के नाम सही है?

मुगलों को लुटेरे कहकर परिभाषित किया जाता रहा है।उनके हर कार्य को गलत ठहराया जाता है और हिंदुत्व के नाम पर इनका तिरस्कार किया जाता रहा है।ये वही हिंदू हैं जो एक तरफ इन्हें गलत ठहराते हैं और दुसरी तरफ इनकी प्रथाएँ जैसे पर्दा प्रथा को अपने जन जीवन में अपना कर सभी को बर्बाद करने के शिखर पर चढ़ा देते हैं।

1947 के समय से हिंदुओं और मुस्लिमों में विभाजन के बीज पनपने के कारण इन में आपसी संघर्ष ने अपनी जगह बना ली।यह एक विकराल रूप से इनके जहन में खासकर कट्टर हिंदू और मुसलमानों में बढ़ती चली गई।ऐसी अनेकों घटनाएं हुई जब नरसंहार हुआ और बेकसूर मानव को धर्म के नाम पर मारा गया।1992 बाबरी मस्जिद का किस्सा भी कुछ ऐसा ही है।अपने आप को हिन्दू कहने वाले राक्षसों ने तर्क दिया कि बाबरी मस्जिद राम भगवान के मंदिर को तोड़ कर बनाया गया है।यहां तक भगवान की मूर्ति को भी खोज लिया गया था। एक ऐसी मूर्ति को खोजा जिसका एक दिन पहले तक कोई पता ही न था। न जाने कहां से एक रात में मूर्ति आ गई और दोनों धर्मों में ऐसे धर्म के पुजारियों ने युद्ध आरंभ करा दिया जिन्हें धर्म का मतलब तक नहीं पता।हजारों की संख्या में लोगों को मारा गया। हिंदू परिषद और राष्ट्रीय सव्यंसेवक संगठन के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी ने रथ यात्रा निकली और मस्जिद को तोड़कर मंदिर की नींव डालने कोशिश की गई और इसी बीच लोगों को मारा गया।

आज बाबरी मस्जिद के ढहने के बाद पूरे 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं।जल्द ही मुख्य न्यायालय का फैसला भी आने वाला है।अपने आप को हिंदू का दर्जा देने वाले कलंक समान लोग मरण दिवस पर ‘विजय दिवस’ मनाने वाले हैं और कुछ ‘शोक दिवस’ और ‘योम ए गम’। विश्व हिंदू परिषद के एक सदस्य ने कहा कि वे मस्जिद कभी नहीं बनने देंगें और मंदिर बनकर रहेगा।

ऐसी विचारधारा के कारण आज भारत के लिए फिर एक कठिन दिन है। उसके लोग दो समूह में बंटे हैं। उसकी ऐकता पर खतरा मंडरा रहा है। उस ऐकता पर जिसे एक हवा को झोंका आकर तोड़ सकता है। हैरानी की बात तो यह है कि भाईचारे के नाम पर ढोंग करने वाले लोग हमारे बीच में ही होकर एक दूसरे के जहन में चाकू घोंप रहे हैं।

निगाहों में सपना वो ढूंढा जा रहा है

जिसे तोड़ा हर पल जा रहा है

कैसा समय यह आ गया है

भाई-भाई को हिंदू मुसलमान

के नाम पर बांटा जा रहा है।।

आज हमारे जीवन का एक और काला दिवस है। यदि कुछ न किया गया तो वो दिन दूर नहीं जब भारत फिर बंटा जाएगा और हर दिन काल जीवन में मंडराएगा।हमारी सहनशीलता खत्म होती जा रही है।इसे हमें बचाना होगा।यदि धर्म के नाम पर हर इमारत हर जगह को खत्म कर दिया गया तो सोचिये क्या हमारे भारत की सभ्यता बचेगी? क्या देश के नाम पर कंलक लगाने के बाद भी हम ‘ऐसा देश है मेरा’ जैसा शब्दों को गर्व से कह पाएंगें?जिस हक से सिर ऊंचा कर चलते है और अपने देश का परचम लहराते हैं क्या हम उसके हकदार होंगे?जिस देश को संस्कृतियों के समूह के नाम से जाना जाता है उसके असतित्व का क्या होगा?हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हम एक हैं और कभी भी कहीं नहीं लिखा कि हम अलग हैं।जो लोग धर्म के नाम पर लोगों को लड़ने को कहते हैं वे अपने मतलब को पूरा करने को ‘जिहाद’ जैसे शब्दों को लाते हैं।

वतन है एक हमारा

धर्म है सही कर्म करना हमारा 

जिसने बांटा है मजहब नाम पर

तोड़ना है ईमान उसका

दिखा प्रेम अपना।।

समय नहीं है अब गम मनाने का हमारे पास बल्कि कुछ ऐसा करना है जिससे ‘हमारे भारत’ का सपना साकार हो।हमारी ऐकता हमारे हाथ हो ताकि कोई गलत नजर उठाने की हिम्मत तक न करे।

 

 

 

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