बर्बादी के रास्ते पर है भारत

Posted by Raushan Kumar Gahlaut
December 14, 2017

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आप किसी साम्प्रदायिक इंसान के विचारों पर ध्यान दीजिये

साम्प्रदायिक इंसान का पहला लक्षण तो यह है कि वह इस मूर्खता में डूबा हुआ होता है कि मेरा मजहब सबसे अच्छा है

आप ध्यान से देखिये कि वह साम्प्रदायिक इंसान औरतों की गुलामी के भी हक़ में होगा

वह मज़हब रवायतों परम्परा महान संस्कृति जैसी सड़ियल बातों का हवाला देकर औरतों के नौकरी करने, घर से बाहर निकलने के खिलाफ बातें करता है

इसी तरह वह साम्प्रदायिक इंसान, मजदूरों को कामचोर कहेगा अमीर सेठों की तारीफें करेगा और कहेगा कि अमीर अपनी मेहनत से अमीर बने हैं

ध्यान दीजिये साम्प्रदायिक इंसान हर प्रगतिशील विचार का विरोधी होता है

असल में आप साम्प्रदायिक ही तब बनते हैं जब आपका दिमाग वैज्ञानिक ढंग से नहीं सोचता

जैसे ही आप वैज्ञानिक ढंग से सोचते हैं आपको समझ में आ जाता है कि मेरा जन्म तो किसी भी मजहब में हो सकता था

इसलिए मैं अपने मजहब को सबसे अच्छा जो समझ रहा हूँ वह तो बेवकूफी है

और एक बार वह वैज्ञानिक ढंग से सोचना शुरू करता है तो फिर उसे यह भी समझ में आ जाता है कि दुनिया का हर इंसान आज़ादी और बराबरी चाहता है

 

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