बिहार के युवाओ के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है सरकार।

Posted by Sant Raaz Bihari
December 10, 2017

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इस खबर को पढ़ते ही हरेक बिहारी युवा के होश उड़ जायँगे की सरकार उनके साथ कितना बड़ा खिलवाड़ कर रही है।
जरूर पढ़े युवा पत्रकार संत राज बिहारी की ऐ रिपोर्ट जो आपको होश में ला देगी।
दोस्तों यह आलेख थोड़ा लंबा है लेकिन इसे आप एक बार जरूर पढ़े क्योकि इस मुद्दे पर अभी तक किसी ने भी लिखने की हिम्मत नहीं दिखाई।
इस खबर को पढ़कर बिहार के हर युवा को होने लगेगा नितीश कुमार से नफरत।
अगर आप बिहार में नौकरी की तलाश में है तो इस खबर को जरूर पढ़े।
साथियो इस खबर को पढ़ते ही आपके मन में यह सवाल जरूर आयेगा की आखिर बिहार में हो क्या रहा है ।
साथियो इस खबर को मैं तीन सवालो के साथ लिखना शुुरु करूँगा और सवाल यह है कि क्या नीतीश कुमार बिहार के छात्र युवा के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है?
क्या नीतीश राज में कोई भी गरीब बच्चा शिक्षक नहीं बन पायेगा और इस समाचार का अंतिम सवाल क्या बिहार के सरकारी बीएड कॉलेज बंद हो जायँगे।
साथियो जैसा की हाल के दिनों में आपने देखा होगा की बिहार सिर्फ प्रचार का केंद्र बनता जा रहा है।
हमारे राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कभी मानव सृंखला तो कभी गुरुगोविंद सिंह जयंती तो कभी बौद्ध महोत्सव तो कभी चंपारण सत्याग्रह और दहेज़ उन्मूलन जैसे कार्यकर्मो में विज्ञापन के नाम पर करोड़ो रूपए खर्च करके राष्ट्रीय छवि बंनाने में लगे हुए है,मगर जमींन पर कुछ भी नहीं दिख रहा है।आज भी सरेआम शादी बारातियों में लौंडे लोग आपको पुरे फुल नशा में मिल जायेंगे।जिसकी कभी भी नीतीश सरकार ने चेकिंग नही कराई।
आप ऐ नही समझे हमें इन कार्यकर्मो से नफरत है बल्कि एक पत्रकार होने के नाते यह सवाल उठाना लाजिमी होता है की जब पूरा बिहार बेरोजगारी अशिक्षा गरीबी और अपराध की चपेट में लिप्त होता जा रहा है।
‌हां मैंने इन्तजार भी किया कोई अखबार वाला या कोई मीडिया बिहार की इन समस्याओं को उठाए ।
लेकिन यहाँ तो जनता से लेकर मिडिया तक सरकार के पीछे पीछे चल रही है। बिहार के प्रिंट मीडिया को नए नए कार्यक्रम बनाकर भरपूर विज्ञापन दिया जा रहा है,जिससे अख़बार वाले सरकार के बजाये धुन पर ही नाचते रहते है।
और जब बात दोस्तों युवाओ के साथ नाइंसाफी की हो तो फिर हमारा कलम सवाल करने से नहीं रोक सकता।
आज अगर बिहार में सबसे बड़ी समस्या है तो वह है पढ़े लिखे बेरोजगारों की ।
हमारे बिहार की अंधिकाश युवा पीढ़ी सरकारी नॉकरियो की तैयारी करते है चाहे उनको वेकेंसी का इंतेजार कई सालों तक क्यों न करना पड़े।
सरकार वैकेंसी भी निकालती है तो जिस साल घोषणा होती है उसके 2 साल बाद रिक्तियां निकलती है और उसके 3 साल बाद परीक्षा होता है और उसके एक सप्ताह बाद ओ परीक्षा भी रद्द हो जाता है।
आखिर इन सब में युवाओं का क्या दोष।
अब हम आते है दोस्तो इस आलेख के मुख्य सवाल पर।
जैसा की अभी हाल ही में सरकार ने 6 साल बाद टीईटी यानि शिक्षक पात्रता परीक्षा के आयोजन के लिये सुचना निकाली थी।परीक्षा भी हुई ,बिहार के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार रिजल्ट गरबर भी हैं।लेकिन ऐ क्या इसकी योग्यता यह की इसमें वही अभ्यर्थी बैठ सकते है जो बीएड पास कर चुके हो।
‌लेकिन मेरा यही पे एक गंभीर सवाल है क्या पहले जो छात्र 2 लाख रुपये खर्च करके बीएड पास किऐ है अब वही शिक्षक बन सकेंगे। क्या वह गरीब छात्र शिक्षक नहीं बन पायंगे जिनके पास 2 लाख रूपए नहीं है।
‌ऐसा मैं इसलिये कह रहा हु की क्योकि आज भी बिहार की 70 % आबादी की सालाना आय 60 70 हजार से ज्यादा नहीं है।ठीक है मैं इस नियम को भी मानने के लिये तैयार हूं कि शिक्षक बनने के पहले ट्रैंड हो। लेकिन अगर कोई गरीब छात्र बीएड करना चाहता हो तो उसके लिये एक विकल्प था कि वह सरकारी बीएड कौलेज से बिएड करले।लेकिन उसमे भी सरकार यह शर्त लगा चुकी है कि जो टीईटी पास होंगे वही सरकारी बीएड कॉलेज से बीएड कर संकेंगे।
‌दोस्तों यहाँ पे गौर कीजियेगा इस आलेख का और पूरे बिहार के युवाओ का गंभीर सवाल यही पे खड़ा होता है।
‌बस मुख्यमंत्री साहब हम युवाओ को आप इतना समझा दीजिये की अगर बीएड पास ही टीईटी में बैठेगा तो फिर सरकारी बीएड कॉलेज में बीएड करने के लिये कौन से टीईटी पास आएंगे। हमने इस पर बहुत ही गौर किया लेकिन इससे जुड़ी कोई भी गाइडलाइन सरकार द्वारा नहीं दिया गया है। आखिर ऐ कौन सी दोहरी नीति है।
‌यहाँ पर सवाल खड़ा होता है कि क्या बिहार के सभी बीएड कॉलेज बंद हो जायँगे।
‌क्या बिहार के कोई भी गरीब छात्र शिक्षक नहीं बन सकता।
‌मुख्यमंत्री जी आप हमारे वर्तमान को दांव लगाकर हमें जबर्दस्ती हमारे ही पैसो से हमें इतिहास बताने पर लगे है। जिस गांधी के बारे में हम बचपन से जानते है उसके बारे में बताने के लिए आप अरबो रूपये खर्च करवाते है विज्ञापन के नाम पर।एक मानंव सृंखला का आयोजन करने के लिए तीन तीन माह शिक्षको से पढाई कार्य छुड़वाकर उससे प्रचार कार्य करवाते है।मुख्यमंत्री जी अभीअभी सुप्रीम कोर्ट ने भी आपको खरी कोटि सुनाई है कि आप पुलिस ,शिक्षकों की भरपूर रिक्तियां खाली होने के बावजूद भी आप इस पर ध्यान नहीं दे रहे। बिहार आप से बस इतना ही सवाल पूछ रहा है कि एक तरफ हर विभागों में भरपूर रिक्तियों और ऊपर से बेरोजगारों की फौज । फिर भी आप कर क्या रहे है। मुख्यमंत्री जी आपको लगता है कि हम युवाओ को गांधी, गुरुगोविंद और बौद्ध के इतिहास नहीं पता तो आपसे निवेदन करता हु की आप रोजगार के लिये रिक्तियां निकालिय और उस प्रतियोगी परीक्षा में आप जितना इतिहास और इन महापुरुषो के बारे में पूछना है पूछिये हम युवा वादा करते है कि हम उन सवालो का जवाब देकर ही नॉकरी हासिल करेंगे।
‌आपको हमें इतिहास बताने के लिये इतने करोड़ो रूपए खर्च भी नहीं करने होंगे। और इन महापुरूषों के इतिहास बताने के आप जो गरीब बिहारियो का करोड़ो रूपए लूटा रहे है ऐ बंद कीजिये। ऐ पैसा आपकी कोई वसीहत सम्पति नही है।ऐ पैसा बिहार के जवानों और किसानों के खून की कमाई है। मुख्यमंत्री जी बस आप यही पैसा सरकारी विभागों में खाली रिक्तियों को भरने में कर दीजिये ।युवाओ को रोजगार भी मिल जायेगा और सभी विभागों में खासकर के पुलिस जैसे विभागों में रिक्तियां भरने से अपराध जैसे समस्यायों पर भी लगाम लग जायेगा । क्योकि बड़े शर्म के साथ कहना पड़ता है कि आज भी बिहार में 1500 की आबादी पर एक पुलिस है।
‌लेकिन मुख्यमंत्री आप ऐसा क्यों करेंगे अगर आपने ऐसा कर दिया तो बिहार में बेरोजगारी ख़त्म हो जायेगा । गरीबी मिट जायगी।हर तरफ विकास होने लगेगा ।
‌युवा आर्थिक शसक्त हो जायँगे और उनकी आने वाली पीढ़िया पढ़ने लगेगी और जागरूक हो जायँगे ।
‌तो फिर आप वोट किस मुद्दे पर मांगेंगे। आप फिर जाती और तुस्टीकरण की राजनीती कर अपना स्वार्थ और महत्वकांक्षा की रोटी कैसे सेंकेगे।
‌लेकिन हाँ अगर आपने अभी से भी नहीं जागा तो याद रखियेगा मुख्यमंत्री साहब यह वही बिहार की धरती है जहाँ से शान्ति के साथ क्रांति की भी शुरुआत होती रही है।
‌और मुझे पूरा उम्मीद है कि एक दिन यही युवा शक्ति आपके इस नाटक वाली सत्याग्रह के बजाय वर्तमान में आपके खिलाफ हकीकत का सत्याग्रह करेंगे।
‌और अंत में मैं ऐ सवाल बिहार के हर उन राजनीती पार्टियों युवा नेताओ पर छोड़ता हु जिन्हें अभी तक युवाओ के इन मुद्दों पर ध्यान नहीं और सिर्फ युवाओ के नाम पर वोट की राजनीती करते है।

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