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भविष्य में धरती की कल्पना करना भी असंभव हो जायेगा |

Posted by Abhishek Rai Sahab
December 22, 2017

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बचपन में अक्सर मेरे और हम सभी के साथ जब हम पढ़ते थे स्कूल में या घर में सभी कहा करते थे कि देखो शेर ऐसा होता है दहाड़ता है उसके बड़े बड़े बाल होते हैं या जैसा भी उसका रंग रूप होता है उस हिसाब से हम सभी बच्चों को बताया करते हैं क्यूंकि बच्चे जानते नहीं हैं कुछ उन्हें तो कल्पनाओं में ले जाना पड़ता है ( कल्पना यहाँ इमेजिनेशन से है लड़की सेनहीं ) |
तो मैं सोच रहा था कि लोग कल्पना करते हैं किसी भी चीज़ की तो किस किस आधार पर करते हैं मतलब वास्तविकता के आधार पर ही हो सकती है न ऐसा तो नहीं होगा कि बच्चों को बिना बताये वो जान जायेंगे कि शेर ऐसा होता है या वैसा होता है या वो खुद ही पता कल्पना में डूब जायेंगे, उन्हें क्या मालूम कि मेरे बिना इस दुनिया में कोई और भी है |
आज से 20 साल बाद या 20 नहीं तो 100 साल बाद जब जंगल (अगर बोला है तो सब कुछ पेड़, पौधे और जानवर सब कुछ आता है उसमे ) तो इसकी कल्पना कैसे कराएँगे हम मतलब कोई तो तरीका होगा |
क्या क्या आर्टिफीसियल जंगल और शेर बनायेंगे या वो आजकल टेक्नोलॉजी का ढोल पिट रहा है आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के नाम पर उसका बना के दिखायेंगे |
में ये कहना चाहता हूँ कि अपना एक पैर, एक आँख, एक कान, एक हाथ और जो भो दो दो हैं शरीर में उसको एक एक कर लेना तब देखना कैसा लगेगा तुम्हारा शरीर या उसकी कल्पना करो |
में बस इतना कहना चाहता हूँ कि यही किया है हमने इस पृथ्वी का और में भी उतना ही दोषी हूँ क्यूंकि मैं भी वो लिख रहा हूँ जो मुझे नहीं लिखना चाहिए था |
~अभिषेक राय साहब

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