” भाग दौड़ भरी इस ज़िन्दगी में अक्सर कुछ लोग पीछे छुट जाते हैं “

Posted by Prince Dwivedy
December 8, 2017

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हमने अपनी भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में ऐसे लोगों को पीछे छोड़ दिया जो आने वाले समाज के आधार स्तम्भ होते है ,आज मैं बात कर रहा हूँ हमारे आसपास नज़र आने वाले कुछ ऐसे छोटे छोटे बच्चों की जो व्यर्थ ही घूमते हुए नज़र आते है और हम सभी उन्हें नज़र अंदाज़ कर अपने काम में व्यस्त हो जाते है , ये बच्चे प्रायः वे होते है जिनके माता-पिता इनके लिए दो वक्त की रोटी के लिए परिश्रम कर रहे होते है और देखभाल व पढाई के अभाव में ये बच्चे इधर उधर कभी खेलते कूदते , कभी ऐसे ही घूमते रहते है और तब इनका संपर्क होने लगता है , नशे में पहले से व्याप्त कुछ इन युवा बच्चों से जिनके माध्यम से ये भी धीरे-धीरे नशे को अपना स्वभाव बना लेते है और जब उन्हें नशे के पदार्थों की पूर्ति नहीं होती तब वे छोटे-मोटे अपराधों को अंजाम देकर उनकी पूर्ति करते है तब तक ये भी उन युवा बच्चों के उम्र के हो चुके होते है जिनके माध्यम में आने से वे इस राह में आ गए थे और ये भी वे ही कार्य करते है तत्पश्चात जब इनके घरों में इस बात की जानकारी होती है तो जैसा की समाज में व्याप्त प्रथा कहा जाए जिम्मेदारियों से बाँधने के क्रम में इनकी शादी कर दी जाती और फिर इनकी संतान भी इन्ही की तरह ही जीवन यापन करती है और कभी कभी तो ये भी होता है की ये स्वयं ही कई बड़े अपराधों की और चले जाते है जिनसे सुधारने के लिए हम कितने ही सुधार गृह का इस्तेमाल कर लें इनका सुधार नहीं होता |

आज समाज के बौद्धिक व समझदार वर्ग को खासकर मैं ये आग्रह करना चाहूँगा हमारे उस वर्ग से जो retirement ले चुके होते है उन्हें भी व बाकी सभी को भी नशे व जुर्म को बढ़ावा दे रही इस कड़ी को तोड़ना होगा और ऐसा नहीं है कि ये व्यथा सिर्फ निम्न वर्ग के लोगों की है ये व्यथा कुछ उच्च वर्ग की भी है जहाँ के बच्चे भी आधुनिक बनने के नाम पर इस राह में चले जा रहे हैं ।

 

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