Youth Ki Awaaz is undergoing scheduled maintenance. Some features may not work as desired.

भारत रत्न डा. भीमराव आम्बेदकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर विशेष

Posted by Raushan Kumar Gahlaut
December 6, 2017

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

 

बाबासाहेब संविधान निर्माता  “भारत रत्न” डॉ.भीमराव अंबेडकर जी की महापरिनिर्वाण दिवस भावपूर्ण श्रद्धांजलि एवं शत शत नमन

क्या आज योगी सरकार द्वारा बाबा साहब को भुलाने की साजिश रची जा रही है आज उनके महापरिनिर्वाण दिवस छुट्टी रद्द करने की आखिर जरूरत क्या थी

बाबा साहेब का योगदान न केवल भारतीय संविधान को आकार देने में रहा, बल्कि उन्होंने आजाद भारत में सभी वर्गो की भागीदारी सुनिश्चित करने की वह राह भी प्रशस्त की जिसके दम पर आज देश को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में विश्व में सम्मान की निगाह से देखा जाता है।

बाबा साहेब का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महाराष्ट्र के महू में एक गरीब और अछूत कहे जाने वाले परिवार में हुआ था। यह वह समय था जब अछूतों का जीवन अत्यंत कठिन था। उनके साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था।

अम्बेडकर जी ने आजादी से पहले से ही अछूतों के अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू किया और वे इस लड़ाई का पर्याय बन गए। आजाद भारत के संविधान में छूआछूत को कानूनन अपराध घोषित करने से लेकर समाज के वंचित तबके के अधिकारों की गारंटी बाबा साहेब की देन है।

जीवन में परिवर्तन के लिए बहुविधि कार्य किये, यदि एक और 1927 में उन्होंने महाड़ सत्याग्रह का नेतृत्व किया तो 1930 में नासिक के कालाराम मंदिर में प्रवेश के लिए आन्दोलन किया l

डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर जी हिन्दू धर्म की क्रूरता और अपमान से इतने आहत हुए कि उन्हें अक्टूबर, १९३५ को येवला जिले में सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करनी पडी कि मैंने हिन्दू धर्म में जन्म अवश्य लिया है। यह मेरे वश में नहीं था किन्तु अब मैं हिन्दू धर्म में मरूँगा नहीं। यह मेरे वश में है।

डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर के १९३५ में हिन्दू धर्म छोडने की इस घोषणा के २१ वर्ष बाद १४ अक्टूबर, १९५६ को नागपुर में अपने पाँच लाख अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म की दीक्षा ले ली।

बाबासाहेब आंबेडकर जी ने महिलाओं के लिए व्यापक आर्थिक और सामाजिक अधिकारों की वकालत की और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए सिविल सेवाओं, स्कूलों और कॉलेजों की नौकरियों में आरक्षण प्रणाली शुरू करने के लिए सभा का समर्थन भी हासिल किया. 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अपना लिया. 11 अक्टूबर 1951 में संसद में अपने हिन्दू कोड बिल के मसौदे को रोके जाने के बाद अंबेडकर ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया

हालाँकि बाद में यह 4 बार में पास हुआ जो निम्न प्रकार है :-

1) 18 मई 1955 – हिन्दू विवाह बिल पास

2) 17 जून 1956 – दलितों के उत्तराधिकार बताये गए

3) 25 अगस्त 1956 – अल्प्सख्यकों के अधिकार मिले

4) 14 दिसम्बर 1956 – हिन्दू अछूत मिलन बिल पास हुआ (यह बिल बाबा साहेब के परिनिर्वाण के बाद पास हुआ जिसको वे अपने सामने पास होते देखना चाहते थे)

युगपुरुष बाबा साहेब का अपने अनुयायियों को अंतिम सन्देश 

“आज यह कारवां जहां है इसे लाने में बहुत कष्ट पीड़ा के बाद यहां तक आई है इसे जहां तक ले जाने में समर्थ हो ले जाओ लेकिन इसे पीछे मत जाने देना “

परमपूज्य बाबा साहेब ने अपने समाज के युवाओं को सन्देश देते हुए कहा कि

शिक्षित बनो! संगठित हो! संघर्ष करो!

एक तो वे शिक्षा और बुद्धि में किसी से कम न रहे, दूसरे ऐशो-आराम में न पड़कर समाज का नेतृत्व करे, तीसरे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी संभाले तथा समाज को जागृत और संगठित कर उसकी सेवा करे l

बाबा साहेब डा. बी. आर. आंबेडकर जी ने अपने एक एतिहसिक भाषण में कहा था कि –देश के हित को अपने स्वार्थ से ऊंचा रखना चाहिए”

l इस देश-प्रेम से ओतप्रोत भाषण ने सबको अभिभूतकर दिया

मरणोपरांत युगपुरुष बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जी को भारत सरकार द्वारा भारत रत्न की उपाधि दी गई 14 अप्रैल 1990 को 

“मृत्यु” जीवन का एक कड़वा सच l जिसके आगोश में सभी को एक दिन जाना ही पड़ता है l 6 दिसम्बर 1956 की सुबह उनकी पत्नी श्रीमती सविता अम्बेडकर ने बाबा साहेब अम्बेडकर को सोते हुए पाया, और वह रोज की तरह बगीचे में टहलने चली गई l पर उन्हें क्या मालूम था कि करोड़ो लोगों का उद्धार करने वाला वह महामानव, युगपुरुष, मानवता का मसीहा अब चिरनिद्रा में जा चुके थे, जब लौट कर वे आयी तो वह हतप्रभ रह गई, बल्कि स्तब्ध…..जड़ हो कर रह गई l

राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं स्वतन्त्रता, समानता तथा बंधुत्व युक्त समाज की स्थापना की दिशा में वे 1920 से लेकर 1956 तक संघर्षरत रहे।

संविधान शिल्पकार बाबा साहेब के महापरिनिर्वाण दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते है l बाबा साहेब अमर रहे l बाबा साहेब अमर रहे ll बाबा साहेब का मिशन अधूरा हम-सबको मिलकर करना है पूरा l

सारा जहां है जिसकी शरण में,

नमन है उस बाबा के चरणों में,

बने उस बाबा के चरणों की धूल,

आओ मिलकर चढ़ाये श्रद्धा के फूल l

Like our page and invite your friends.

भारत रत्न
डा. भीमराव आंबेडकर
बाबा साहेब की शव यात्रा की दिन मुबंई में सफेद धोती खत्म हो गई थी

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.