मजहब नहीं सीखाता आपसे में बैर रखना*

Posted by Roki Kumar
December 10, 2017

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सोशल मीडिया पर धर्म और जाति के प्रति नफ़रत भरी पोस्ट /फ़ोटो देखना आम सी बात हो चुकी है। इस नफरत को देशप्रेम -देशभक्ति का चौला पहनाकर लोगों के दिलों में नफ़रतों के बीज बोये जा रहे है। कभी लव जिहाद तो कभी किसी अन्य कारणों को दिखा कर धर्म के ठेकेदारों ने इसे सिर्फ अपना बिज़निस बना लिया है । अपने इस बिजनिस को चमकाने ओर चलाने के लिए कुछ ठेकेदारों ने मीडिया में झूठ और अफ़वाह का बाज़ार लगा रखा है । लोगों की आंखों में झूठी देशभक्ति की धूल झोंक कर लोगो की समझ को अंधा बना दिया है। राजस्थान के राजसमंद जिले में एक व्यक्ति को कथित तौर पर लव जिहाद का आरोप लगा कर जिंदा जलाते दिखाया गया । सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति पहले देश प्रेम की बाते करता हैं और फिर वो व्यक्ति इंसानियत को भूल कर बहुत बुरी तरह एक आदमी को मारकर ,उसे आग के हवाले कर देता हैं। मारा गया आदमी का सिर्फ इतना कसूर है कि वो एक अल्पसंख्यक समुदाय से था । मुस्लिम मजदूर मोहम्मद अफरोजुल से हमारे धर्म को ऐसा कौन सा खतरा पैदा हो गया, जिसके कारण हत्या कर दी गई और सोशल मीडिया पर ऐसे शेयर किया जा रहा है, जैसे शंभू लाल ने देश के लिए कोई गोल्ड मैडल जीत लिया हो। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर शंभू लाल को गरीब और निर्दोष बता कर इंसाफ की गुहार लगाई जा रही है। भला एक गरीब आदमी कैसे किसी को इतनी क्रूरता से मार सकता है।धर्म के नाम पर लोगों को मारने की ये कोई पहली घटना नही है ,इससे पहले भी बहुत से बेकसूर लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। “16 वर्षीय जुनैद” की इस साल “22 जून “को मथुरा जा रही ट्रेन में भीड़ ने पीट-पीटकर और चाकू मारकर हत्या कर दी थी। घटना के वक्त जुनैद दिल्ली के सदर बाज़ार से ईद की ख़रीदारी कर अपने गांव लौट रहा था ।
एक तरफ़ तो हम *मानव अधिकार दिवस* बना कर मानव के अधिकारों की बात करते है ,और दूसरी तरह देश किसी के *मानव अधिकारों के साथ खिलवाड़* हो रहा हैं। ये बात सिर्फ किसी जुनैद या मोहम्मद अफरोजुल की नही है ,”बात है इंसानियत की” ” बात है , हमारे संविधान की है “। हमारा सविंधान हर धर्म और हर जाति को बराबर सम्मान देने की बात करता हैं। फिर कैसे कोई धर्म का ठेकेदार हमारे सविंधान को चुनौती दे सकता हैं ? एक तरफ़ एक भीड़ किसी इंसान को पीट – पीट कर मार सकती है ,और किसी व्यक्ति को जिंदा जलाया जाता है ,
तो फिर मुझे नही लगता की हमारे सविंधान के कुछ मायने रह जाएंगे। पता नही क्यों लोग बिना सोच समझ के ऐसी मुहिम का हिस्सा बनते जा रहे है , जिसका अंत सिर्फ और सिर्फ विनाश है। एक पल के लिए ये मान भी लिया जाए कि देश मे सिर्फ एक ही धर्म के लोग रहेंगे , तो भी इस बात की क्या गारन्टी है कि धर्म के ठेकेदार अपने ही धर्म के लोगो पर क्रूरता नही दिखाएंगे । अगर हम दूसरे शब्दों मे कहे तो क्या आज वर्तमान में अपने ही धर्म वाले कुछ जातियों पर अपनी क्रुरता नही कर रहे ? धर्म के ठेकेदारों को कानून व्यवस्था का भी कोई डर नजर नही आता और वो खूलेआम किसी का भी गला काटने का बयान देते है। मेरा सवाल हमारे देश की न्याय पालिका से भी है, कि क्यों ऐसे लोगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज नही होता ,जो सिर्फ अपने मतलब के लिए देश में नफ़रतों का माहौल बना रहे हैं ?
मेरे देश में अनेक ऐसे गाँव ,बस्तियां ,और मौहल्लें है जहां पर एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के साथ बहुत प्यार-प्रेम से रहते है ,और एक -दूसरे के हर धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होते है ।और एक दूसरे की शादी में बने खाने का स्वाद भी लेते है। ऐसी जगह पर *ईद की बिरियानी* और *दीवाली की मिठाईयों*ं में किसी धर्म की कोई लकीर नजर नही आती । वो कुछ ही लोग है जो सिर्फ अपनी दुकान चलाने के लिए नफ़रतों के बीज लोगों के दिमांगो में लगा रहे है।मैं अपने देश के हर नागरिक से यही अपील करता हुँ की दिमांग को बंद करके किसी बातों में ना आये। देश प्रेम का मतलब किसी की जान लेना नही है। मेरे देश की खूबसूरती इस बात से ही है कि मेरे देश में हर धर्म ,हर जाति के लोग रहते है ,और यही हमारी ताकत भी है।
अंत मे सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूं कि *मजहब नहीं सीखाता  आपसे में बैर रखना*।।

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