मन की आवाज

Posted by VIKASH PANNDEY
December 15, 2017

Self-Published

गुजरात चुनाव समाप्त हो गया,और इसी के साथ चुनावी गहमागहमी भी समाप्तहो गई।अब उम्मीद है कि सारे नेता चुनावी मतभेदोंको भुला कर असली मुद्दों पर आ जाएंगे।लेकिन बीते चुनाव में जो सबसे मजेदार बात रही वह यह रही कि लगभग सभी पार्टियां प्रधानमंत्री पद की मर्यादा की बात कर रहे थे और समाज को यह नैतिक जिम्मेवारी देने पर तुले थे कि पद की मर्यादा हमारी संबैधानिक कर्त्तव्य है।वास्तव में होना चाहिए,लेकिन एक नागरिक होने के नाते यह तय करने का भी मुझे अधिकार होना चाहिए कि मैं किसकी इज्जत करु और किसकी नही।मैं भूतपूर्व प्रधानमंत्री माननीय मनमोहन सिंहजी एक ब्यक्ति एवं एक अर्थशास्त्री के रूप में बहुत इज्जत करता हूँ ,लेकिन एक प्रधानमंत्री के रूप में वे एक निहायत ही अयोग्य व्यक्ति थे।आजकल मनमोहन सिंह जी काफी दुखी दिखाई देते है लेकिन काश वे टैब दुखी होते या कुछ बोलने की हिम्मत दिखाते जब राहुल गांधी उनके कैबिनेट द्वारा पास बिल को प्रेस कॉन्फ्रेंसमें फाड़ देते है या फिर उनके मंत्रिमंडलके मंत्री बड़े घोटाले करते है और वे चुपचाप बड़ी संजीदगी से कहते है कि मुझे कुछ मालूम नही।हमारे भूतपूर्व प्रधानमंत्री के बारे में शायद यह कहना गलत नही होगा कि वर अब तक के भारत के सबसे असफल प्रधानमंत्री थे।

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