मानवाधिकार का संघर्ष

Posted by NooruDdin Khan
December 10, 2017

Self-Published

सम्पूर्ण विश्व में मानवाधिकार दिवस मनाया जा रहा है साथ ही साथ विश्व आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा आज भी अपने मूल अधिकारों के लिए दिन रात संघर्ष कर रहा है। जब तक समाज के उपेक्षित और निचले पायदान पर खड़े लोगो के अधिकारो की बात न की जाये तब तक मानवाधिकार की बात करना और इसके लिए आयोजन करना बेमानी है। विश्व आबादी के एक बहुत बड़ा हिस्सा तो आज जीने के अधिकार के लिये संघर्षरत है। बात चाहे सामाजिक समानता के अधिकार की हो या भोजन के अधिकार की हर जगह एक असंतोषजनक स्थिति ही नज़र आती है। जो अभी दिन-रात भोजन के अधिकार के लिए ही संघर्ष कर रहा है वो शिक्षा और स्वास्थ के अधिकार के बारे में क्या सोच सकता है। बात तो यहाँ तक है कि वंचितों और शोषितों में ज्यादतर लोगों को मालूम ही नहीं होगा की उनके अधिकारों के लिए ही मानवाधिकार दिवस है। हम सबको मिलकर एक ऐसे समतामूलक समाज के निर्माण के लिए प्रयासरत रहना चाहिए जहाँ हर एक के मानवाधिकारों की रक्षा होती है क्यों की मानवाधिकार ही न्याय की कसौटी है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि मानवाधिकार कभी भी इस बात की इज़ाज़त नहीं देता कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आप दूसरों के अधिकारो का हनन करें। …… सामाजिक समानता से मानवाधिकार है , मानवाधिकार से न्याय है ,न्याय से शान्ति है , शान्ति से समृद्धि है, समृद्धि से खुशहाली है। तो आइये हम सब मिलकर एक खुशहाल समाज का निर्माण करें।
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।

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