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लेखक जो बन न सका

Posted by Kunwar Anshul Shah Markam
December 5, 2017

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दोस्तों बचपन से लिखना नही पसंद था पढ़ कर उद्वाचन की बहुत दिलचस्पी थी परंतु परिस्थितियों ने आवाज को बुलंदी नही दी फिर भी डटा रहा आसमानों को चीरती गगनभेदी पुकार लगाने को तड़फता रहा फिर समझ आया कि बिना श्रोता के आप अच्छे वक्ता नही बन सकते तमाम प्रकार की वजह थी

और इन सब परिस्थितियों ने पा छोड़ा राजनीति के गलियारों में और वो भी बुरे वक्त में जब लोगों को राजनीति का मतलब तो नही पता पर उन्हें बस इतना पता है कि उन्हें राजनीति से नफरत है अब आलम ये कि अगर आप ने यह भी बोल दिया कि पेट्रोल महंगा हो गया है तो लोग कहते थे राजनीति मत करो अगर आपने सामने वाले से भिन्न मत पर बात की तो लोग कहते थे राजनीति मत करो आलम इतना दुर्दशा भरा हो गया था कि वो नेता जिनके लोग विरोधी हैं उन लोगों को आपने यदि उनके विरोधी नेता का नाम ले लिया मतलब आप देशद्रोही हैं जैसे तमाम प्रकार के अपवाद तैयार हो गये

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