विवाद, की खूबसूरती को समझने की जरूरत है.

Self-Published

विवाद, महज तीन अक्षरों का ये शब्द है, लेकिन इसका उच्चारण अक्सर उग्र स्वरूप में ही किया जाता है, जब भी कोई व्यक्ति इस शब्द “विवाद” को कहता है, उस समय उसके चेहरे पर झलक रहा डर समझा जा सकता है, यही वजह है की हम अक्सर हर तरह के विवाद से बचना चाहते है क्योकि हमें पता है कि विवाद की गहराई की कोई सीमा नही है और एक बार जब इस में कोई व्यक्ति, खासकर एक आम जन मानुष धस गया, तो वह आम तौर पर इस में धस्था ही चला जाता है, ओर जब विवाद से उसका निवारण होता है, तब वह महज अकेला, सबसे अकेला, किसी सड़क के किनारे खड़ा होता है, जंहा उसकी पहचान खत्म हो गयी होती है सही शब्दो में कहूँ तो विवाद के माध्यम से उसकी पहचान को खत्म कर दिया गया होता है, इसी कारण अब लोग उसकी पहचान करने से भी मना कर देते है, क्योकि अब ओर कोई विवाद ने जन्म ले लिया है, जिसका शिकार कोई और हो रहा है.

ये जानते हुये, की हमारे लोकतंत्र देश में किसी भी विवाद पर बात करना, अपनी राय रखना, अमूमन पसंद नही किया जाता क्योकि लोग बस विवाद और उसके शिकार हो रहे व्यक्ति को एक तमाशा मात्र बन कर देखने में ही रुचि रखते है, ओर किसी भी आजाद ख्यालात व्यक्ति की अपनी निजी राय, आम लोग के मनोरंजन में खलल पहुँचा सकती है, इसी वजह से, आज विवाद देखने और पढ़ने तक ही सीमित रह गया है, हमारे आजाद देश में हम किसी भी विवाद पर आजादी से बोलने का हक नही रखते है, कुछ कठोर शब्दो में कहा जा सकता है की किसी भी विवाद पर हमें अपने व्यक्तिगत विचार रखने की आजादी ही नही दी जाती है. लेकिन अगर विवाद को पढा जा सकता, उसका अध्ध्यन किया जा सकता, तो मेरी ये व्यक्तिगत राय है कि ये बहुत खूबसूरत है, लेकिन इसी तथ्य से मैं उन लोगो से माफी भी मांगना चाहता हूँ, जिन्हे किसी ना किसी विवाद से कोई नुकसान हुआ है.

विवाद, किसी भी संदर्भ में हो सकता है, जमीन, शराब, समाज, पारिवारिक, धार्मिक, देश और इसकी सुरक्षा, इतिहास, विश्व, इत्यादि, मसलन हर जीवित या किसी ना किसी रूप रेखा में जो भी प्रदार्थ अपनी मौजदूगी का एहसास करवा सकता है, विवाद उस से जुड़ने की पूरी संभावना रखता है, लेकिन वर्तमान समय को देखते हुये, भारतीय समाज और राजनीति में जो विवाद पिछले कुछ समय से छाये हुये है, वह समय, इतिहास, देशभक्ति, महिला, अभिव्यक्ति की आजादी, गाय, इत्यादि मसलो के इर्द गिर्द ज्यादा दिखाई देते है लेकिन इन सभी विवादों का केंद्र बिंदु जो बन कर उभरता है, वह है हमारा खबर संसार, जो कि मुख्यतः विवाद को जन्म देने में ज्यादा रुचि रखता है जिसके पश्च्यात खबर संसार की यही कोशिश होती है कि विवाद को जितना गहरा किया जाये उतना कम है, खबर संसार आज विवाद को जन्म देने में इतनी क्यो रुचि रखता है ? इसके कई कारण हो सकते है लेकिन जो समझने की जरूरत है, की खबर संसार द्वारा विवाद को इतना बड़ा बना दिया जाता है, की वह हर आदमी जो किसी ना किसी माध्यम से, खबर संसार की पहुँच में है, वह अक्सर विवाद पर अपनी एक निजी राय बना लेता है, जिसे सार्वजनिक रूप से वह कहने में तो झिझकता है लेकिन, विवाद के प्रति अपनी राय के विरोधा भाषी शब्द उसे पसंद नही आते, उसकी जटिल मानसिकता ये नही समझ सकती कि ख़बर संसार द्वारा रचा गया विवाद, वास्तव में समाज को बाटने की मानसिकता है.

इसका दूसरा सबसे मजबूत पहलू, की ख़बर संसार द्वारा रचा गया ये विवाद, अक्सर कुछ और मुद्दों को शांत कर देता है, खासकर, वह मुद्दे जो वास्तव में विवाद के चक्रव्यूह में घूमने चाहिये थे लेकिन, मौजूदा विवाद के कारण, ये सारे मुद्दे, किसी भी तरह के विवाद को जन्म देने में असमर्थ ही रहते है, सच्चाई में ख़बर संसार की ये सबसे बड़ी जीत है, की वह जिस मुद्दे को विवाद की शक्ल देना चाहता है वही विवाद की रूप रेखा में उभर कर आते है. मसलन, बाबा राम रहीम का पंचकूला कांड, खबर संसार की सुर्खियां बन गया और कई दिनों तक, पूरे देश को इस खबर ने मानो कैद कर दिया था लेकिन सोचिये की इसी समय दौरान नोटबंदी के समय कितने, पुराने नॉट बैंक में जमा किये गये, इसे सार्वजनिक किया जाता है लेकिन  ये आंकड़े कही भी अपनी उपस्थिति दर्ज नही करवा पाये, खासकर, जब नोटबंदी, के समय इतना हो हल्ला हुआ हो, फिर भी पुराने नोटो की जमा की गई संख्या, क्यो सुर्खिया नही बन पाई ? जवाब बहुत सामान्य, ख़बर संसार, चुनींदा खबरों को विवाद की शक्ल देता है, जंहा लाभ और नुकशान दोनों को तोला जा सके.

इस तरह के विवाद की एक ओर भी रूप रेखा है, जिसे समझने से, इंसानी जज्बात को समझना बहुत आसान हो जाता है, एक विवाद के भीतर, कई छवि, व्यक्तिगत किरदार, समय, घटनाएं मौजूद होती है, लेकिन हर विवाद को एक ही छवि से जोड़कर, ख़बर संसार द्वारा इसे, उजागर करना, व्यक्तिगत रूप से मुझे, विवाद को समझने के लिये ओर प्रोतसाहित करता है, इसी संदर्भ में वर्तमान समय के विवादों को समझा जा सकता है, मसलन ख़बर संसार में इस समय सबसे चर्चा का विषय फ़िल्म पद्मावती का मुख्य किरदार रानी पद्मावती ही है, जिसके मध्यनजर, इतिहास को खंगाला जा रहा है लेकिन इसी समय दो और फिल्म भी विवाद के दायरे में आ रही है, एस दुर्गा ओर न्यूड. खासकर अगर फ़िल्म पद्मावती को समझे तो यंहा बादशाह खिलजी ओर राजा रतन सिंह चर्चा का विषय नही है, धर्म और मजहब, विवाद का उग्र रूप नही है, अगर किसी पर बहुत ज्यादा चर्चा हो रही है तो वह रानी पद्मावती, मतलब एक महिला, इसी नजरिये से बाकी दो फिल्मों को देखे तो यंहा भी महिला किरदार ही, विवाद का कारण है, किसी ना किसी तरह, बुद्धिमान, जटील, सामान्य मानसिकता इस पर अपनी राय रख रही है, लिख रही है, पढ़ रही है, बोल रही है, यही कारण है कि अब ये विवाद बढ़ा हो गया है, लेकिन इस विवाद के जरिये जिस तरह, पद्मावती के किरदार में मौजूद, अदाकारा दीपिका पादुकोण को धमकियां दी जा रही है, उस माध्यम से, विवाद चीख चीख कर एक सच बता रहा है, की 21वी सदी के उभर रहे शिक्षित भारत के समाज में, आज भी महिलाओं की स्थिति बहुत दयनीय है, फिर चाहे समाज धर्म या मजहब से ही क्यो ना जुड़ा हो, अगर विवाद को समझा जाये तो हर विवाद का सारांश, एक सुलझे हुये समाज को बनाने में मदद कर सकता है.

इसी माध्यम से, विवाद को समझे तो इसका केंद्र बिंदु जो छवि, व्यक्ति, घटना है उस से कही ज्यादा ये दूसरे व्यक्ति, के लिये खतरनाक हो सकता है जो इसी विवाद में एक छिपी हुई तस्वीर है, मसलन अभी हाल ही में चर्चा का विषय बनी, एक सीडी, जिसमे हार्दिक पटेल के शामिल होने की बात कही गई लेकिन इसी सीडी में एक महिला भी मौजूद है, जिसका चेहरा नही दिखाई देता, सोचिये कही अगर इसी महिला का चेहरा इस सीडी में दिखाई दे जाता, तो ये सीडी से जुड़ा हुआ विवाद कितना घातक हो सकता था, हमारा समाज जो हर विवादित सीडी को चित्कारिया लेकर, देखने का पूरा लुफ्त, उठाता है जंहा वासना के मध्य नजर आखो को सेका जाता है, वँहा किस तरह सार्वजनिक होने पर एक महिला की जिंदगी, सामान्य रह सकती है, विवाद का ये तथ्य भी, हम से यही संवाद करता है, की महिलाओं की स्थिति आज भी, सामान्य नही है, हमारे समाज में महिला कहने को तो माँ है लेकिन, समाज की रचना में इसका स्थान कही भी विशेष नही है.

विवाद की ओर एक खूबसूरती है, ये समाज में उस नायक को भी पैदा करता है, जो समाज को बदलने की हिम्मत, मानसिकता ओर सोच रखते है, इसी के नजरिये से अरविंद केजरीवाल, कन्हिया कुमार, गुलमेहर कोर, शेला रशीद, उम्र खालिद, हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवानी, ये सभी किसी ना किसी विवाद के कारण ही सुर्खियों में आये और आज अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब हो रहे है, ये सभी नोजवान है, शिक्षित है अगर ये आगे चलकर हमारे समाज की काया कल्प करने में कामयाब हुये, तो इसमे उस विवाद की बहुत बड़ी भूमिका होगी जिनके कारण ये सुर्खियों में आये थे.

मैं भी पहले, किसी भी विवाद की लोह में जज्बाती हो जाता था, विवाद के संदर्भ में अपनी एक निजी सोच, राय पर जटिलता के साथ पहरा देता था जंहा किसी भी तरह के संवाद की कोई गुंजाइश ही नही थी, लेकिन जबसे विवाद को पढ़ना शुरू किया है, में विवाद की खूबसूरती का कायल हो चुका है, आज मैं किसी भी विवाद में किसी भी तरह जुड़ कर अपनी मौजूदगी का एहसास नही करवाना चाहता बल्कि एक दर्शक के रूप में इसे समझने की कोशिश करता हूँ, थोड़ा समय लेता हूँ और इसके सारांश से, समाज में क्या उथल पुथल हो सकती है, उसका अंदाजा लगाने की कोशिश करता हूँ, वास्तव में जब तक हम सभी विवाद को एक दर्शक के रूप में नही देखते, नही पढ़ते, इसका अध्ध्यन नही करते, तब तक, सकरात्मक विवाद की जगह हमारे समाज में नही बनाई जा सकती और ख़बर संसार द्वारा, आज जिस तरह नकरात्मक विवाद को उभारा जा रहा है, वास्तव में उसके लिये हम खुद ओर हमारा समाज ही जवाबदार है. क्योकि आज नकारात्मक विवाद हमारे आकर्षण का कारण बन चुका है.

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