संस्कार..!!

Posted by मेघा योगी
December 19, 2017

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********संस्कार*******

ईश्वर ने प्रतिभा को बड़ी फुरसत में सौंदर्य की मिट्टी से संवारकर सर्वगुण संपन्न होने का आशीष दिया,
प्रतिभा का नाम व्यक्तित्व को सार्थक करता हुआ,
विकास के संग परिणय में बंधकर शीध्र ही संपन्न और सुसंस्कारी परिवार की बहू बन गई,
मधुयामिनी का खुमार उतरा भी न था कि सासू माँ की कर्कश आवाज ने तंद्रा भंग कर दी,
बहू हम संस्कारी लोग हैं 6बजे से पूर्व नहा कर रसोई में प्रवेश करना होगा,8बजे नाश्ता टेबल पर चाहिये,
मैं ने मेरे बच्चों को बहुत अच्छे संस्कार दिये हैं,
तुम्हारे घर जैसा नहीं चलेगा,बहुत जल्द हमारे संस्कारों में ढलना होगा,
हाँ में सिर हिलाकर प्रतिभा काम पर लग गयी,
सासू माँ द्वारा प्रतिभा के हर काम में कमी निकालना,तुम्हारे माँ बाप ने तुम्हें यही संस्कार दिये हैं इस वाक्य द्वारा बात बात पर उसके माँ पिता जी को अपमानित किया जाना रोज की बात थी,
पति द्वारा शारीरिक शोषण और थर्डडिग्री टोर्चर प्रतिभा की दिनचर्या का मुख्य अंग बन चुका था,
अवसाद ग्रस्त प्रतिभा अपना आत्मविश्वास खोने लगी,
घर की सफाई करते समय एक पुरानी अखबार पर एक सुविचार लिखा था,पढ़ा और अपने काम में लग गयी,
विकास के आते ही सासू माँ ने प्रतिभा द्वारा दिन भर में किये गुनाहों का हिसाब देना शुरु कर दिया,साथ ही अपना तकिया कलाम
“मैंने अपने बच्चों को बहुत अच्छे संस्कार दिये हैं,तेरे माँ बाप ने तुझे कुछ नहीं सिखाया”
और कुछ ही पलों में आज का थर्ड डिग्री कार्यक्रम पूरा हुआ,
विकास द्वारा प्रतिभा को बोले जाने वाले अपशब्द और उसके माँ बाप को दिये जाने वाले ताने चल ही रहे थे कि प्रतिभा अपने मुँह से बह रहा खून पोछते हुये लगभग चीखती हुई बोली… “भगवान के लिए बंद करो ये संस्कारों का ढोंग,मुझे पता चल गया है माँ जी आपने अपने बच्चों को बहुत अच्छे संस्कार दिये हैं,”
किस प्रकार से पत्नी के घर वालों का अपमान करना है,कैसे पत्नी को शारीरिक और मानसिक रुप से प्रताड़ित करना है,
और विकास तुम्हारे संस्कारों से मैं अच्छी तरह से बाकिफ हूँ,मेरे होठों से बहता खून तुम्हारे संस्कारों का सबूत है,
मैं ने माँ जी की हर बात को सहन किया कभी किसी बात का जबाब नहीं दिया,क्योंकि बड़ों का सम्मान करना मेरे संस्कार हैं,
लेकिन अब
मैं इस घर को छोड़ कर जा रही हूँ आप जैसे संस्कारी लोगों के खानदान में मुझ जैसी संस्कार हीन लड़की के लिए कोई जगह नहीं है,
प्रतिभा ने सामान समेटा और दरवाजा पटकते हुये घर से निकल गई,
प्रतिभा का ये रूप देखकर माँ बेटे दोनों दंग रह गये,
अब तक जो अपने संस्कारों का दंभ भरते थे,एक दूसरे से नजरें नहीं मिला पा रहे थे,
और प्रतिभा रास्ते में उस सुविचार को पुनः मन में दोहरा रही थी
*गलत सहन करने वाला व्यक्ति भी उतना ही गुनाहगार होता है जितना कि गलत करने वाला*

मेघा योगी गुना म. प्र

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