समय के साथ नोटा का बढ़ता प्रयोग

Posted by Rohit Gupta
December 20, 2017

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समय के साथ नोटा का बढ़ता प्रयोग आखिर किस विषय की मांग कर रहा है यह तो क्लियर है कि नोटा का प्रयोग अपनी एक मांग को प्रदर्शित कर रहा है देश के लीडर और लीडरशिप को नकारा जा रहा है हमें यह समझना होगा कि अपने वर्तमान लीडरों को नकार कर आखिर वह क्या मांग कर रहा है नोटा का प्रयोग यह तो साबित करता है वह राजनीति में इंटरेस्टेड है लेकिन परिवर्तन की मांग कर रहा है क्या वह परिवर्तन समाज में वर्तमान नेताओं से संभव नहीं दिखता शायद नहीं नोटा का प्रयोग हमें जरुर बताता है अब हमें देखना यह है कि नोटा के प्रयोग का अधिकार देकर उनकी मांग को खारिज तो नहीं कर रहे जिस प्रकार बहुमत की सरकार होती है उसी प्रकार अगर  नोटा बहुमत की ओर जा रहा हैं तो हमें सरकार भी नोटा की  बनानी  चाहिए लेकिन यह बात तो अपने आप में अधूरी है क्या हमें नोटा का प्रयोग करने वाले से ही नहीं कुछ संभव बहुविकल्पी का प्रयोग करके यह जान लेना चाहिए की नोटा  का प्रयोग कर बात मान ली ड लीडरशिप को नकार कर वह भारत की राजनीति में क्या परिवर्तन चाह रहा है शायद वह खुद भी सरकार का हिस्सा नहीं बनना चाह रहा है लेकिन इतना तो जरूरत है कि वह एक बड़े परिवर्तन की मांग कर रहा है हमें उसकी क्या हो रहा है हमें उसकी मांग को समझा जाना चाहिए क्योंकि यह उसका लोकतांत्रिक अधिकार है और सब की बात सुनी जाना यही तो लोकतंत्र है और अगर नोटा बहुमत में हो कर भी नकारा तो क्या यह है लोकतंत्र की हत्या और उसके साथ खिलवाड़ नहीं है फिलहाल है क्या सोचने विचार विमर्श करने का विषय है जो एक बड़े परिवर्तन की ओर इशारा कर रहा है मांग कर रहा है

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