हमारा व्यवहार ही बच्चों का संस्कार होता है, संस्कारी बनाने की कोई मशीन नहीं होती

Posted by sat_ender
December 15, 2017

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This poem is for those parents who get irritate while dressing-up their child for school in morning

And start using bad languages in front child

Like…..

खेलने में इसे कुछ नहीं होता, स्कूल जाने में इसे मौत पड़ती है

दिन-भर कुतिया/कुत्ते की तरह खेलता/खेलती रहेगी/रहेगा

होमवर्क करने में ड्रामा करती/करता है

And every morning they beat their children while dressing-up them

आख़िर क्यों हम अपना ग़ुस्सा बच्चों पर उतार देते हैं ?

कृप्या बच्चों से उन्हीं के अंदाज़ में बात करें

Don’t behave like adult in front of them

छोटी सी इक बच्ची है

पाँच साल की लगती है

है वो नटखट चंचल सी

और बात बात पर हंसती है

खेल कूद में नंबर वन

और पढ़ने में भी अच्छी है

लेकिन भैया सुबह सुबह जब

जाग के वो जब उठती है

मार दहाड़े रोती है

और हाथ पैर भी पटकती है

नहीं जाउंगी नहीं उठूंगी

मम्मी पर हाथ उठाती है

फिर मम्मी के कुछ चांटो से

गाली में लिपटी डाटों से

उसकी आँखें खुल जाती हैं

मम्मी की कुढ़ती बातों से

 

फिर पापा भी उठ जाते हैं

इस चिल्लम चिल्ली के अंदर

लेकर गोद में कहते हैं

बिना पिटे स्कूल न जाना

लाडो की है आदत ये

उठकर तुमको रोज़ हँसाना

पापा की है आदत ये

इक बार जो रेडी हो जाए

फिर चार्ज बैट्री होती है

ब्रेड खाउंगी मक्खन से

पापा को आर्डर देती है

 

फिर पापा उसको कहते हैं

क्यों मम्मी पर हाथ उठाती हो ?

बिना पिटे और बिन रोए

स्कूल क्यों नहीं जाती हो ?

 

वो भोलेपन से कहती है

फिर मम्मी क्यों हाथ उठाती है ?

क्यों मुझको डांट लगाती है ?

क्यों मटक मटक कर

हँसा-हँसा कर मुझको नहीं उठाती है

इसका-उसका उसका-इसका

सबका ग़ुस्सा मुझपर क्यों बरपाती है ?

 

ये रोज़ तमाशा होता है

मैं रोज़ ही देखा करता हूँ …

 

आज हुई इक बात नई

बच्ची ने माँ को गाली दी

माँ ने मारा जमकर आज

नहीं किया फिर कोई लिहाज़

कहाँ से गाली सीखी है

मुझको दे तू आज जवाब

मुँह से कुछ ना बोली वो

बस रोते-रोते हुई निढाल

बस रोते-रोते हुई निढाल…………………..

What she said to her mother ?

कुतिया कहीं की पागल सी
क्योंकि माँ भी उस से कुछ इसी अंदाज़ में बात किया करती थी
तो अब आप खुद देखिये उसने ये कहाँ से सीखा

बच्चों का किरदार आपका प्रतिबिंब होता है

Satender ‘Manam’

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