हमारी भी कोई आवाज़ है…..

Posted by Ritu Sharma
December 6, 2017

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हमारी भी कोई आवाज़ है…..

हमें हर समय,हर जगह और हर समय में औरतों के सम्मान की रक्षा में तत्पर खड़ी,हथियार थामे,शोर मचाती पुरुषों की भीड़ नज़र आती है…..जो सदियों से हमारी इज्जत के पहरेदार होने का दावा करते आये हैं और कर रहे हैं!

कभी अपनी शान और रुतबे की खातिर,तो कभी हमें जीतने के लिए जंग के ऐलान हुए……

फिर हमारी सुरक्षा के लिए उस जंग में भी कई लोगों ने अपना खून बहाया…और अपनी विजय की उद्घोषणा की……

लेकिन न हमें लड़ना सिखाया गया….और न उस जीत में हमारा हिस्सा था……और न उस हार में हमारी जीत थी…..

हमने कई बार बिन लड़े ही हार भी मान ली…

और कई बार खुद को ही ख़त्म कर लिया…..

समय बीतता गया और हमारी पहरेदारी के दावे तेज़ होते चले गये…..

फिर एक नया युग आया…..एक नई रोशनी

की किरण हमें दिखाई दी….लगा जैसे कि अब हमसे भी पूछा जायेगा…कि हम क्या चाहते हैं?

कुछ रोशनी हमारे हिस्से आई भी…….

हमें किताबों की रोशनी मिली…..चहारदीवारी के बाहर का उज़ाला भी थोड़ा -थोड़ा मिलने लगा……

मगर…..उस उज़ाले की चकाचौंध के पीछे कई सुर्ख साये थे…जो हमारे चेहरे की चमक से घबराये हुए थे….

वे इस चमक को छीनने की साजशें करने लगे…..हमारे चेहरों को नोचने लगे….

हम इन सबके खिलाफ़ अपनी आवाज़ उठाने ही वाले थे कि…….हमें फिर कुछ पहरेदार दिखाई दिये…जो हमें घेरे हुए थे……इस तरह घेरे हुए थे कि हमारी रोशन दुनिया फिर हमसे ओझल होने लगी…..पर हमने रोशनी का दामन थामे रखा…..लेकिन हमारे हिस्से पूरी रोशन दुनिया न आ सकी..

वो भीड़ अभी मारे पास है …हमें घेरे हुए है…..

और रोज़ाना हमसे हमारी रक्षा के वादे किया करती है……हमें हमारी इज्जत को बचाने के मसवरे दिया करती है…….कभी हमें ही हमारे खिलाफ़ हो रही हिंसा का जिम्मेदार ठहराती है…..कभी हमें ही मर्यादा में रहने के लिए धमकाती है….कभी हमें जान से मारने ,तो कभी हमारी नाक काट लाने के फरमान सुनाया करती है…..कभी नारे लगाते हैं कि हम पर आंच भी नहीं आने देंगे….

इन तमाम दावों,धमकियों और शोर के बीच……हम अभी भी इस उम्मीद में हैं कि ये भीड़. कब हिस्सों में बंटकर हमसे दूर जायेगी…..और कब हम अपनी रोशन दुनिया में सुकूं पायेंगे….कब हमारे नाम पर लड़ने और मर-मिटने वाले हमसे दूर होंगे…और कब हमारी आवाज़ की भी कोई अहमियत होगी..और कब हमसे पूछा जायेगा कि हम क्या चाहते हैं?

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