इंसानियत को रौंदती हैवानियत

Posted by Ashish Kumar
January 16, 2018

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

बीते एक हफ्ते के दौरान हरियाणा में गैंगरेप की कई घटनाएं सामने आई हैं जिसने वहां की कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्न चिह्न लगा दिया है। साथ ही साथ इन घटनाओं की बर्बरता ने मानवता पर भी एक प्रश्न चिह्न लगा दिया है कि क्या वाकई में आज हमारे समाज से इंसानियत और मानवता खत्म होती जा रही है? पहली घटना हरियाणा के जींद जिले की है जहां एक 15 वर्षीय किशोरी के साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया गया और उसके शरीर के साथ इतनी बर्बरता की गई कि उसका वर्णन यहां संभव नहीं है।

दूसरी घटना पानीपत की है जहां कूड़ा डालने गई एक 11 वर्षीय लड़की को अगवा कर उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक हत्या के बाद शव के साथ बलात्कार किया गया। इस मामले में पुलिस ने दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। वहीं, तीसरी घटना में काम से घर लौट रही एक 22 वर्षीय युवती को अगवा कर उसके साथ गैंगरेप किया गया। युवती के शरीर पर चोट के गंभीर निशान भी मिले हैं।

हरियाणा में महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए गठित ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में एक जनवरी से 30 नवंबर के बीच बलात्कार के कुल 1238 मामले दर्ज किए गए हैं यानी तकरीबन हर दिन 3 से भी ज्यादा बलात्कार की घटनाएं घटित हुई हैं। अगर बात सिर्फ बलात्कार की घटनाओं की होती तो इसे कानून-व्यवस्था के हवाले किया जा सकता था लेकिन बलात्कार की इन घटनाओं में जिस तरह की वीभत्सता और बर्बरता हमारे सामने आ रही है वो तो यही बता रहा है कि समाज का नैतिक पतन भी हो रहा है। बलात्कार के ये आरोपी मानसिक तौर पर बुरी तरह कुत्सित हैं जो इंसान से हैवान बन गए हैं।

अक्सर कहा भी जाता है कि पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों में इंसान सबसे समझदार जीव होता है लेकिन कुछ वहशी इंसानों द्वारा किए गए इस अमानवीय कृत्य के बाद ये कथन पूर्ण सत्य तो प्रतीत नहीं होता। हां एक बात और कि ये बातें सिर्फ हरियाणा के लिए ही लागू नहीं होती, महिलाओं के प्रति अत्याचार और बलात्कार के ये आंकड़ें आपको देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह से मिल जाएंगे। ऐसी घटनाओं को शिक्षा का हवाला देकर नजरअंदाज करने की कोशिश भी नहीं की जा सकती है क्योंकि ये शहरों और शिक्षित परिवेश में उसी तरह घटित हो रही हैं जैसी ग्रामीण परिवेश में।

बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को महिलाओं के छोटे कपड़े जैसे कुतर्कों के सहारे छिपाने वाले मानसिक रूप से संकीर्ण लोग ऐसे वक्त में अपनी जुबान बिल्कुल भी नहीं खोलते जब नवजातों और मासूमों के साथ भी दरिंदगी की जाती है। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए समाज में सिर्फ कानूनी क्रांति से काम नहीं चलने वाला। इसके लिए हमें सामाजिक क्रांति की भी जरूरत है जिसमें ऐसे अपराधियों को नियंत्रित करने की व्यवस्था हो। इसके लिए एक गहरे शोध की भी आवश्यकता है जिससे इंसानियत को रौंदती हैवानियत को रोकने की व्यवस्था की जा सके।

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.