कानून के शिंकजे में एंग्री यंग सेवक-बाॅबी कटारिया

Posted by Saurabh Arora
January 14, 2018

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एक बाॅडी बिल्डर लड़का बाॅबी कटारिया कई दिनों से सोशल मीडिया पर हलचल मचाया हुआ है जिसके सोशल मीडिया पर लाखों फाॅलोअर्स भी है, लेकिन आज वो सलाखों के पीछे है उसके ऊपर धारा 186,323, 332,386,353,379B,506 के तहत छेड़खानी,जबरन वसूली,धमकी,हरिजन एक्ट समेत इतने सारे केस लगे है और छह-सात दिन की उसकी रिमांड भी हो चुकी है लेकिन बाॅबी को तो लोग बहुत ‘लाइव’ से जानते है एक गरीब, असहाय मददगार के तौर पर, सिस्टम के खिलाफ़ लड़ने वाले एक एंग्री सेवक के तौर पर जो अपने गुस्से को काबू में नहीं रख पाता जब एक असहाय,गरीब की सुनवाई नहीं हो रहीं हो प्रशासन में खासकर पुलिस प्रशासन में इसी के खिलाफ लड़ते हुए या पुलिसवालों के कामों को उजागर करते हुए वो लाइव वीडियों के माध्यम से सवाल करते-करते बेकाबू हो जाता है और गुस्से में गाली तक भी दे बैठता है इसी के साथ कोई गरीब किसी के द्वारा पीड़ित है तो उसके लिए इंसाफ मांगते हुए भी थोड़ा बेकाबू हो जाता है ऐसा ही कुछ थोड़े दिन पहले हमनें देखा जब एक स्कूल बस से एक गरीब बच्ची का एक्सीडेंट के बाद पैर कट जाता है और उसी स्कूल संचालक से उस बच्ची की मां के साथ वीडियों से चेतावनी देते हुए ठोस इंसाफ की गुहार करता है आंसुओं के साथ भावुक भी हो जाता है लेकिन अगले वीडियों अपनी बोली के माफी भी मांगता है और खुद पूरे इलाज की ज़िम्मेदारीं उठा लेने की कहता है फिर भी स्कूल संचालक का वीडियों सामने आता है और वो उल्टा इसकों जात-पात की बेइज्ज़ती का मेटर बना देता है और उल्टा चेतावनी भी दे देता और इन संचालक को लोग काफी रसूखदार भी बताते है तो इसी के साथ उसकी स्कूल की प्रिंसिपल ने भी बाॅबी पर धमकी वगैरह के केस लगवाए है मतलब बच्ची को इंसाफ की तो छोड़ों उल्टा मेटर ही कहीं और पहुंचा दिया गया और उसके लिए लड़ने वाले उसके मददगार को ही जेल में पहुंचा दिया गया।


गुरू ग्राम के रहने वाले 30 वर्षीय बाॅबी कटारिया जिन्होंने युवा एकता फाउंडेशन के नाम से एनजीओ भी बनाया है। कुछ लोग कह रहें है कि वो ये सब फेमस होने के लिए कर रहा है और मदद करने के वीडियों क्यों बनाता लेकिन कहते है न जब आप कोई बड़ा काम करने निकलों तो आलोचक भी सामने आते है दरअसल आजकल दुनिया नेगेटिव भी बहुत हो चुकी है और हर किसी में कमियां निकालने के साथ सामने वाला कुछ अच्छा भी करें तो भी उसमें उसका स्वार्थ सोचती है खुद भले ही आगे आकर कुछ न करें और जो करे उसमें कमियां निकाले, स्वार्थी समझें या दूसरें को फेमस होते देख डाइजेस्ट न कर पाए। लाइव वीडियों में न तो कोई कट है न एडिट है न ही जिन लोगों की वो मदद कर रहा है वो कोई नाटक है जब सब कुछ प्रत्यक्ष है साफ है फिर भी कुछ लोग कई सवाल उठाएं तो फिर तो सोच जिसकी जैसी। लाइव मीडियों वो इसलिए बनाता है ताकि सभी सबूत दुनिया के सामने हो,किसी एक्सीडेंट में कोई घायल पड़ा है अगर वो इसकी मदद कर रहा है तो उस घायल की उसके परिजन तक खबर पहुंचे और दुनिया जागरूक हो और पूरे सबूत के साथ काम हो अगर वो लाइव सिटिजन रिपोर्टर-मददगार के तौर पर इतने बड़े-बड़े काम कर रहा है तो शायद भारत में कोई पहली बार इस तरीके से नई टेक्नोलॉजी के संसाधन के इस्तेमाल का बिल्कुल सहीं सकारात्मक इस्तेमाल कर रहा है जिसकी सबकों सीख लेनी चाहिए हां मान लिया अति-उत्तेजना में पुलिस को गाली देना गलत है वो मर्यादाओं से बाहर गया तो उसकी सज़ा उसकी धाराएं लगनी चाहिए लेकिन इतने सारे गंभीर केस इतने दिन की रिमांड और परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने रिमांड में प्रताड़ना- मारपीट भी की है जिससे बाॅबी चल तक नहीं पा रहा है इतना तो कोई आतंकवादी से भी वर्ताव नहीं करता उल्टा बाॅबी तो लोगों का मददगार है उसी की ये सज़ा है क्या? तो ये सब वाकई गलत हो रहा है और सभी दुनिया देख भी रही है, गुस्से में भी है।गालियां और मारपीट तक का शिकार तो वैसे आम आदमी भी कई बार होता है पुलिसचैकिंग या अन्य मामलों ठीक है हम नहीं कहते पूरा पुलिस प्रशासन खराब है लेकिन बड़ी तादाद में पुलिस की वो ब्रिगेड है जो अपनी पावर का मिसयूज़ करती है और लोगों को अपमान का घूंट तक पीना पड़ता है पुलिस गालियां देते हुए सरेआम बेइज्जत करती है इसी के साथ कोई आम इंसान इनके गलत व्यवहार का विरोध करें तो ये कानून का डर दिखाके हवालात में बंद करने केस ठोकने तक की धमकी देती है और आम आदमी कई बार अपमान और गलत बात का घूंट पीकर यूं ही रह जाता है। तो जो भी इस उससे गुज़रा है वो तो बाॅबी के साथ है ही साथ ही वो सब भी जो इस सिस्टम से परेशान हो चुके है और बदलाव चाहते है तो ऐसे में वो बाॅबी का साथ दें रहे है क्योंकि ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है सोशल साइट्स पर जहां लोग बाॅबी को खुलकर लाखों की संख्या में समर्थन दें रहें है और पूरे देश के साथ विदेश से भी समर्थन मिल रहा है इस युवा को। ये बात सहीं है कि बाॅबी के समर्थन में जो आंदोलन हुए वहां उतनी भीड़ नहीं पहुंच रहीं जो समर्थन की ताकत दिखा सके क्योंकि आम लोगों के पास समय की कमी के साथ शासन-प्रशासन के खिलाफ़ सामने आकर विरोध करने का सामर्थ हर किसी के पास नहीं है लोग डरते है लेकिन सोशल साइट्स छानों तो जैसे समर्थन की बौंछार आई पड़ी है।

देश के एक बड़े चैनल ने बाॅबी के कामों की पड़ताल करीं तो सभी काम, लोगों के लिए की मदद सहीं निकली तो ऐसे समय में जब एक युवा जो बिना किसी जात-पात-धर्म देखे लोगों की मदद कर रहा(वो बात अलग है कि जात-पात वालों ने समय समय पर उसे घेरा है बात कहीं और इश्यू जात का बनाया है) हो तो ऐसे में उसको लोगों का तो साथ चाहिए ही होगा अगर वो जात-पात वाला होता तो दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज़्यादा बाॅबी के जात के ही पुलिसवालें ही वो किसी दलित की लड़ाई के लिए उनकों भला-भुरा नहीं बोलता अपना जात-पात निभाता और उससे भी ज़्यादा वो जात-पात वाला होता तो आज उसके समर्थन में उसके जात वाले बड़ा आंदोलन नहीं करके हिला शासन-प्रशासन हिला देते क्योंकि इसकी जाति ने तो आंदोलन करके रेल-शहर तक जाम करें है कहने का मतलब है वो जात-पात से ऊपर उठकर काम रहा है जो आज बहुत ज़रूरी है तो ये सब सामने है और उसके समर्थन में जितने भी लोग आए है वो सभी जातियों के है।

तो ऐसे समय में जब सभी युवाओं को आम आदमी को अपने हक के लिए,नाइंसाफी के खिलाफ़ आगे आना चाहिए ऐसे समय में अगर कोई सामने हो तो वो लोगों के साथ के बिना आगे नहीं बढ़ पाएगा खासकर वो तो गरीब की लड़ाई लड़ते ही मुसीबत में आया है, ये सरकारें-प्रशासन यहीं दबा देंगे दुनिया ने देखा कैसे गुरू ग्राम में ही वो मासूम प्रद्युम्न हत्याकांड में कातिल तो कोई रसूखदार का लड़का निकला लेकिन पुलिस और रखवसूखदारों ने मिलके गरीब कंडक्टर को फंसा दिया तो ऐसी पुलिस को क्या माने? उसी पुलिस के शिकंजे में अब बाॅबी कटारिया एक गंभीर अपराधी के तौर पर खेर सब दुनिया के सामने लाइव हो रहा है और इन सबसे लड़ने के लिए आम लोगों को ही आना पड़ेगा और जो लड़ रहा है उसका साथ देना पड़ेगा वरना आम आदमी कभी अपना न सिर्फ असली हक ले पाएगा न ही नाइंसाफी के खिलाफ़ लड़ पाएगा वो बस जब चाहें ऐसे ही कुचल दिया जाएगा अब बाॅबी के केस को लोग ढंग से देखे,समझें और आगे आए क्योंकि बाॅबी को अकेले न देखते हुए हम आम आदमी के हक की लड़ाई के तौर पर देखें, सींखे। जहां आज करोड़ों युवा बेरोज़गार घूम रहा है आम आदमी गरीब अपने हक से वंचित है, नाइंसाफ़ी झेल रहा है तो इन सब से लड़ने के लिए मजबूती से आगे आना तो पड़ेगा जहां मोबाइल और गेज़ेट्स के साथ फिज़िकल प्रेज़ेंस भी बेहद ज़रूरी है।

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