कानून से ऊपर करणी सेना

Posted by Ram Kishor Soothwal
January 23, 2018

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“कानून से ऊपर करणी सेना”

जिस तरह फिल्म पद्मावत को लेकर विरोध और तोड़फोड़ की घटना हो रहीं हैं उस से एक बात तो साफ हैं कि करणी सेना और तमाम फिल्म विरोधी संगठन कानून से ऊपर है… सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आने के बाद भी कानूनन उसका पालन नहीं करना इसका सीधा सा मतलब है कि आप का इस देश की सम्मानित न्यायपालिका पर ही भरोसा नहीं है.. जो कि गलत हैं….

विरोध क्यूँ : आप सभी जानते है कि इस फिल्म का इतना विरोध क्यूं हो रहा है इस फिल्म में रानी पद्मावती के चरित्र चित्रण को गलत तरीके से दिखाया गया हैं.. लेकिन रिलीज से पहले ही संजय लीला भंसाली के द्वारा पत्रकारो के एक पूरे पैनल को और राजपूत प्रतिनिधियों को फिल्म दिखायी गयीं.. इसके बाद फिल्म में काफी कट लगाये गये जो कि मीडिया रिपोर्टस दावा कर रहीं हैं.. फिर इसके विरोध को देखते हुये इसका नाम पद्मावती से पद्मावत कर दिया गया.. लेकिन करणी सेना हैं कि मानती ही नहीं.. फिल्म को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी अपना फैसला दे चुका हैं… लेकिन तोड़फोड़ करना कहां तक उचित है…

सबसे अहम सवाल यह है कि जो आप इस फिल्म में देखने देना नहीं चाहते वो तमाम देशवासियों को पता चल चुका है कि फिल्म के विवाद और विरोध की वजह क्या है …लेकिन फिर भी करणी सेना शायद कानून का अनुसरण करना नहीं चाहती हैं… हम भी चाहते हैं कि इतिहास के तथ्यों से गलत छेड़छाड़ नहीं हो लेकिन इस देश की सम्मानित अदालत का फैसला आने के बाद तोड़फोड़ करना न्यायपालिका के फैसले की सीधी सी अवहेलना करना है… फिल्म के अलावा और भी गंभीर चुनौती हमारे समाज के सामने है उनको लेकर ना तो कोई विरोध होता है और ना हीं कुछ और वो चुपके से स्वीकार कर ली जाती हैं …इस देश की यही तो समस्या है कि यहां पर शुरू से जातिवाद, धर्म और क्षेत्रवाद के नाम पर हर विरोध और झगड़े होते रहते हैं.. लेकिन मानवता के नाम पर कोई कुछ करना नहीं चाहता है…इन विरोध और तोड़फोड़ में जनता के आयकर के पैसो का ही नुकसान होता है जो कि विकास कार्यो पर खर्च होना चाहिए.. लेकिन मेरे देश की सम्मानित जनता को कब समझ आयेगा कि हमारे लिए सबसे जरूरी हमारा विकास और मानवता का कल्याण है… लेकिन अफसोस कब तक ऐसा होता रहेगा… ऐसा नहीं है कि इसमें सिर्फ जनता ही जिम्मेदार है कहीं ना कहीं राजनीति भी अपना रंग डाल देती हैं.. वो भी बराबर की भागीदार है…. अब यह होना चाहिए कि तोड़फोड़ करना और अन्य विरोध करना गलत हैं.. आप अपना शांति से विरोध जारी रखिए…. लेकिन अदालत के फैसले का भी सम्मान करे तो बेहतर होगा…

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