क्या गुजरी होगी ?

Posted by NK Trippy Lekhak
January 26, 2018

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मां होती है इस आस मे
आयेगा बेटा सरहद से लोटकर ,

ना खबर थी के बेटा आयेगा तिरंगे को ओढ़कर

गया उसका लाल इस दुनिया से दुर
अपनी मां को अलविदा बोल कर,

बेटा तो आया पर सांसे नही थी,
गर्व था मां को पर उस

ममता की आंखो मे आज  नमी  थी,
मां रोती रही क्योकी उसकी सांसे
उसके बेटे मे थमी थी ,

ऐसा लगा था जैसे
पैरो के नीचे से गई जमी थी,

बता नही सकता उस ममता के हाल को,

जिन हाथो मे खेला करता था वो
आज वही हाथ ढुढ़ रहे उन हाथ को,

क्या – क्या सपने लिए बेठी थी  मां
बेटा ही था सब कुछ बेटा ही था जहां,

आज अलविदा बोला उसने सर जमी 

इस जहान  को

और घर बना लिया उसने  उस  आसमान को ,

– NK TRIPPY LEKHAK

 

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