खुद को पहचानों

Posted by Amar Pratap Choudhary
January 3, 2018

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

कभी आइने के सामने शक्ल देखी है अपनी?
नज़रों से नज़र मिलाना और मुस्कुरा के कहना ख़ुद से कि तुम ख़ुद वो हो जो दिख रहे हो?
ये जो शराफ़त का नक़ाब पहन रखा है तुमने ये कबतक रहेगा?
कबतलक दोगली बातों से सबका दिल बहलाओगे?
कबतक सड़े दिमाग़ के सड़ने की वहज ढूँढोगे?

कबतक मीठी मीठी बातों के पीछे अंदर के कमीनेपन को छुपाओगे?
कबतक अच्छे बनने का दिखावा करोगे?
कबतक ख़ुद की ग़लतियों पे सबको सफ़ाइयाँ देते रहोगे?
कब ख़त्म होगा तुम्हारा दूसरा पहर?
कबतक जीयोगे उधार की ज़िंदगी?
कबतक कठपुतली की तरह नाचा करोगे? कबतक?
कबतक झल्लाते हुए मुस्कुराते रहोगे?
कबतक ख़ुशी ख़ुशी अपनी बर्बादी की प्रेम कहनी लिखोगे?
कबतक उन कहानियों को खिलखिला के गुनगुनाओगे?

तुम सामने से कुछ और थे और पीछे से हमेशा कुछ और!
कबतक बिना ग़लती के माफ़ी माँगोगे?
कबतक अपने भूलने की आदत पे थोपते रहोगे सारी भूल?
कबतक जियोगे उस एक वादे पे?
कबतक डर डर के प्यार का दिखावा करोगे?
आँखों में मोहब्बत की चमक कहाँ से लाओगे?
कबतक दोगली मुस्कान से हसोंगे ख़ुद पे?

कबतक ख़ुद की मौत का मातम तुम मनाओगे?
कबतक बाप के क़र्ज़े की आड़ में माँगा करोगे उधार?
कबतक चुप रह कर जवाब देते जाओगे?
कबतक भागोगे ख़ुद की सच्चाई से?
कब तक आत्मसम्मान का गला घोट मुसकाओगे?
कबतक बेनाम खुतूत दिल में दफ़नाओगे?

हर वक़्त न जवाब होता है न दिया जा सकता है!
हर वक़्त बस घुटा जा सकता है।
कुछ ग़लतियों पे!
कुछ नग़मों पे!
कुछ कहनी पे!
कुछ कमिटमेंट पर! तुमने मार दिया है ख़ुद को उस चंद अल्फ़ाज़ को ज़िंदा रखने के लिए!

ज़िंदगी सबको एक मौक़ा देती है जिसमें तुम दूर रहते हो उनसे!
तुम न जी पा रहे होते हो न ही मर!
ख़ुद से लड़ते झगड़ते हुए तुम पहुँच जाते हो उनके पास। उनको मनाने! ये जानते हुए कि साथ रहने और होने में फ़र्क़ है!
उस वक़्त जब तुम सब कुछ भूल भाल के दोबारा रोते गाते उनको मनाने पहुँच जाओगे न तो रुक जाना! नैतिक शिक्षा भूल जाना!
रुक गए तो ज़िंदगी बन जाएगी! नहीं रुके तो अपने चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पाओगे! सड़ जाओगे अपने दिमाग़ की तरह!

सबका एक ग़ैरेंटी होना है!
चांस हमको भी मिला था..लेकिन नैतिक शिक्षा में मिसटेक हो गया!
नहीं तो आज हम बड़ियार आदमी होते!
एक्सपीरियंस शेयर कर रहे हैं लेना है तो लीजिए वरना सरकइए, हमको बोलने का मौक़ा दीजिए बाबू..!

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.