नया साल ऐसे मनाया जिसे कोई सोच भी नही सकता

Posted by Ikram hindustani
January 1, 2018

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नया साल ऐसे मनाया जिसे कोई सोच भी नही सकता
दिल्ली -इंस्टीट्यूट ऑफ लर्निंग मनिया(आईएलएम) ने हर बार की तरह इस बार भी इंसानियत दिखाते हुए एक नया काम किया। आईएलएम ने नए साल के आगाज़ पर वो किया जिसे कोई सोच भी नही सकता। जी हां आप सोच रहे होंगे आखिर इस संस्था ने आख़िर ऐसा किया क्या?
क्योंकि हर इंसान नए साल में अपनों के साथ रहकर साल का आगाज़ करता है वहीं आईएलएम की टीम ने अपने नए साल की खुशियां रेड्डी पटरी वालों के साथ उनका समान खुद बेचकर उन्हें अपनेपन के साथ साथ आर्थिक रूप से भी सहारा दिया।
आपको बता दें आईएलएम की टीम ने मुख्य पॉइंट गरीब, बुज़ुर्ग और दिव्यांगों के हाथ से हाथ मिलाना था।
दुकानदार इस्लाम जिनके दोनों पैर भी नही है लेकिन वो चाय और कॉफी बेंचते हैं,वहीं एक उपेंद्र हैं जो एक हाथ और पैर से दिव्यांग है और वो समोसे बेंचते हैं, वहीं एक जग्गन हैं वो भी दिव्यांग है उसके बाद भी सब्ज़ी और फल बेंचते हैं।

 

संस्था ने इन सब के साथ रहकर थोड़े ऊपर के दाम में इन सब की चीज़ें बेचीं और इन सभी लोगों को आर्थिक रूप से मदद की। तकरीबन 4 घण्टे से ज़्यादा दिल्ली के बटला हॉउस चौक पर आईएलएम की टीम दुकानदार बनी हुई थी जिन्हें देख कर हर इंसान उनके जज़्बे को सलाम कर रहा था और दिव्यांग दुकानदार उन्हें फरिश्ता समझ रहे थे।

आपको बता दें आईएलएम की फाउंडर शमा खान हैं जो इस तरह के इंसानियत को बचाने वाले काम करती रहती हैं, इससे पहले भी दीवाली पर उनकी टीम ने गरीब बच्चों के साथ मिलकर दीवाली मनाई थी। इनकी टीम में हिना कौसर, इकराम खान, मिनहाज निज़ामी, तारिक़ मुनीरा, शगुफ्ता समेत कई लोग थे।

वहीं इनको सहयोग देने इमाम अब्दुल्लाह बुखारी वेलफेयर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी डॉ ज़मीन आज़मी, अतिब, खादिम हुसैन रिज़वी, नॉफिल, हारून समेत कई सदस्य ने इनसे समान खरीदा और उनके कदम को सराहा।
वहीं जिस तरह से एक दिव्यांगों और गरीब के साथ उनको अपने पन दिखाने की जो पहल की गई है उससे ज़रूर हर इंसान के दिल का ज़मीर भी जाग उठेगा।

 

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