फासीवाद: बहस नहीं, ध्वस्त करो!

Posted by Krishna Singh
January 18, 2018

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

दोस्तों फासीवाद को समझो, जो पहले के पूंजीवादी तानाशाही से भिन्न है, यहाँ तक कि १९७५ के इमरजेंसी से भी मूलतः भिन्न है!
फासीवाद भी पूंजीवाद का ही एक रूप है, जैसे crony capitalism, state capitalism, monopoly capitalism, imperialism, conscious capitalism, social democracy, स्वराज, आदि!
पर फासीवाद, पूंजीवाद का बेहद सडा और खुनी रूप है. साथ साथ यह एक “जन आन्दोलन” भी है. जर्मनी, इटली, हाल फिलहाल में ईरान (और उक्रेन उदहारण है). यहाँ पर जनता के एक भाग ने पूंजी-कठमुल्लों का साथ दिया, अमेरिकी पिट्ठठु, भ्रष्ट राजा शाह को हटाने के लिए, और लाया एक और खतरनाक शाषन, जो मजदूर और महिला विरोधी था!
दूसरा लक्षण है इस फासीवाद का, “प्रजातंत्र” के हर स्तम्भ को ध्वस्त कर देना: न्यायलय, सरकार, पुलिस, प्रशाषन, शिक्षा क्षेत्र, विज्ञानं और इतिहास, आदि!
जनता के बीच एक भय पैदा करना, जो दिख रहा है. इस जन आन्दोलन का हथियार है, अकूत पैसे, धर्म, जाती, मिडिया, सोशल मिडिया, आदि!
यानि सांप्रदायिक दंगे भी इसी फासीवाद का लक्षण है, जो इसके माँ, यानि पूंजीवाद, के गर्भ में ही था और समय समय पर बुर्जुआ दलों ने इसका इस्तेमाल किया, जनता के बीच की एकता को तोड़ने के लिए और अपनी रोटियां सेकने के लिए!
पर क्यूँ? पूंजीवाद में अंतर्विरोध है, जिसका हल उसके पास नहीं है. घटता मुनाफा दर और बढ़ता बेरोजगारी, साथ साथ बढ़ता मजदूर वर्ग, किसानों, युवाओं का असंतोष! यह अंतर्विरोध पूंजीवादी उतपादन का स्वभाविक लक्षण है. इसके साथ बढती धन सम्पदा, पर कुछेक बड़े पूंजीपतियों के हाथ में! यानि बढता सापेक्ष गरीबी, निरपेक्ष गरीबी के साथ!
तो, लक्ष्य है मेहनतकाश जनता की एकता और संघर्ष को तोड़ना, और मुनाफे दर को येन केन प्रकारेण बढ़ाना! सारे श्रम कानून को ख़त्म करना, पर्यावरण कानून को कूड़ेदान में डालना, जमीन अधिग्रहण कानून लाना, जीएसटी, नोत्बंदी, एकाधिकार मूल्य वसूल करना पेट्रोल, दाल, सब्जी, आदि पर, बैंक के द्वारा हमारे ही पैसे को लुटना, बेल इन, इत्यादी! बड़े पूंजीपतियों के अरबों खरबों के कर्ज और कर माफ़ करना!
क्या हमारे देश में यह नहीं दिख रहा है?
यदि है तो केवल तथाकथित अच्छे कामों से, प्रचार से और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने से फासीवाद या इसकी जननी पूंजीवाद या इसके और किसी भी रूप को हम हरा सकते हैं? क्या समाज से बेरोजगारी, साम्प्रदायिकता और भ्रष्टाचार ख़त्म कर सकते हैं?
तो लडाई का आधार केवल पूंजीवाद के विरोध में सर्वहारा वर्ग के एकता औए संघर्ष ही हो सकता है! बाकि तरीके असफल ही होंगे! और यदि छोटे मोटे सफलता हासिल भी होंगे तो सत्ता पूंजी के हाथों में ही रहेगी, जो फिर से वही काम करेगी जो आज दिख रहा है, भले ही पार्टी बदल जाये या फिर तारीका ही बदल जाये!
यदि मेरे बातों में कुछ तथ्य लगे तो आगे बात कर सकते हैं. वर्ना ऐसे ही एक दुसरे को, किसी और के लेख को फॉरवर्ड करते रहेंगे! सही स्थिति की सही व्याख्या हो तो हमारे राजनितिक पहल का, फासीवाद के विरुद्ध संघर्ष का, समाज में व्याप्त अन्याय के खिलाफ हमारे हस्तक्षेप का कोई सही मायने होगा. भले ही हमारी कोशिश कितनी भी छोटी हो, पर सही धारा के साथ होगा और क्रांति के सफलता में एक सहयोग होगा!!
फासीवाद पर बहस कर समय ना बर्बाद करें! इसे ध्वस्त करने के लिए आगे आयें!
इन्कलाब जिंदाबाद! मजदूर एकता जिंदाबाद!

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.