“बाल यौन शोषण: अपराध, अधिनियम एवं सामाजिक जागरूकता “

Posted by Yogesh Dhasmana
January 10, 2018

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“कभी खुले आँगन में खेला करता था बचपन, संकीर्ण हुआ इंसान और चाहरदीवारी  में कैद हुआ बचपन, फिर भी शर्मिंदा नही हुआ इंसान और अब बन्द कमरों में भी सहम गया बचपन” | बाल शोषण की बढती घटनाएं हमारे समाज का सबसे बड़ा चिंताजनक विषय है, परन्तु यह मुद्दा कभी ज्यादा चर्चा में नही होता क्यूंकि अभी भी लोगों में बालशोषण  के प्रति कोई जागरूकता उत्पन नही हो पाई है |

एन० सी० आर० बी० (नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो ) द्वारा नेशनल डाटा पोर्टल पर उपलब्ध कराये गये आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015 में बालकों पर हुए अपराधों की कुल संख्या 94172 थी जो की कुल अपराधों का 21.1% थी | इनमे से भीं बाल  शोषण के (जो की पोक्सो  के तहत धारा 4 एवं धारा 6 के अंतर्गत दर्ज किये गये) अपराध 8800 थे | शर्मिंदगी भरे तथ्य यह हैं की बाल शोषण के 8800 मामलों में से 8341 अपराध परिवार एवं आस –पड़ोस में रहने वाले किसी पहचान के व्यक्ति द्वारा किये गये जो कि कुल बाल यौन शोषण का 94.8% है | इनमे से 138 अपराध दादा, पिता, भाई द्वारा घटित हुए |

बालकों पर होने वाले यौन हमलों के लिए “लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम” 2012 लाया गया | इस अधिनियम के अंतर्गत लैंगिक हमला, लैंगिक उत्पीडन और अश्लील साहित्य के अपराधों से बालकों के संरक्षण के लिए विभिन्न नियम एवं सजाएँ सुनिश्चित की गयी हैं, साथ ही ऐसे अपराधों के विचारण के लिए धारा 28 के अधीन विशेष न्यायालयों की स्थापना एवं धारा 32 के अधीन विशेष लोक अभियोजक का प्रावधान भी है |

अधिनियम में बालकों पर होने वाले लैंगिक अपराधों को विभिन्न भागों में बांटा गया है, प्रत्येक के लिए अलग- अलग सजाओं का प्रावधान है | प्रवेशन लैंगिक हमलों के लिए न्यूनतम 7 वर्ष से आजीवन कारावास की सजा एवं जूर्माना है | यदि प्रवेशन लैंगिक हमला किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जिसका दायित्व बालक की सुरक्षा का है जैसे हॉस्टल वार्डन, शैक्षणिक संस्था का कर्मचारी, अस्पताल परिसर का कर्मचारी आदि ऐसे मामलों को गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला की श्रेणी में रखा गया है एवं इसके लिए न्यूनतम दस वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा तथा जूर्माना होगा | बालकों पर बिना प्रवेशन लैंगिक हमले के लिए जहाँ तीन से पांच वर्ष की सजा एवं जूर्माना है वहीं विना प्रवेशन  गुरुतर लैंगिक हमले के लिए  न्यूनतम पांच से सात वर्ष तक की सजा एवं जूर्माना होगा | बालकों का लैंगिक उत्पीडन करने पर भी तीन वर्ष तक की सजा एवं जूर्माना सुनिश्चित है |

अश्लील प्रयोजनों के लिए बालकों का उपयोग करने जैसे की मीडिया के प्ररूप में बालक की जननेन्द्रियों का प्रदर्शन करना आदि के लिए पांच वर्ष की सजा एवं जूर्माना होगा | यदि दूसरी बार अपराध सत्य होता है तो सात वर्ष की सजा एवं जूर्माना किया जाएगा | अश्लील प्रयोजनों के साथ – साथ यदि व्यक्ति धारा 3, धारा 5 एवं धारा 9 के अंतर्गत दोषी पाया जाता है तो अलग-अलग कठोर सजाओं का प्रावधान है | अश्लील सामग्री का भण्डारण करने पर भी तीन वर्ष की सजा एवं जूर्माना होगा |

यदि व्यक्ति किसी अपराध के लिए उकसाता है अथवा किसी षड़यंत्र में सम्मलित होता है अथवा किसी अपराध को करने के उद्देश्य से कोई अपराध घटित हो जाता है  अथवा अपराध करने में मदद करता है या जानबूझकर तथ्यों को छिपाता है तो वह भी दण्डित किया जाएगा |

सजाओं के प्रावधानों के अतिरिक्त मामलों की रिपोर्ट करने की प्रक्रीया को भी अधिनियम में सुनिश्चित किया गया है | पुलिस द्वारा ऐसे मामलों की प्रत्येक रिपोर्ट लेखबद्ध की जाएगी और सुचना देने वाले को पढ़कर सुनाई जाएगी | अनावश्यक बिलम्ब के बिना चौबीस घंटे की अवधी के भीतर मामले को बालक कल्याण समिति और विशेष न्यायालय अथवा सेशन न्यायालय में रिपोर्ट किया जाना प्रतिबद्ध है | साथ ही कोई व्यक्ति या मीडिया बिना किसी पूर्ण या अधिप्रमाणित सुचना रखे किसी बालक के सम्बन्ध में ऐसी कोई टिप्पणी नहीं करेगा जिससे उसकी ख्याति का हनन या निजता का अतिलंघन होना प्रभावित होता है |

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में किये गये कठोर प्रावधानों के बावजूद आज भी कई बाल यौन शोषण के मामले दर्ज नही करवाए जाते हैं | बालकों को यौन शिक्षा से परिचित कराया जाना आवश्यक है ताकि बच्चे ऐसी घटनाओं की सुचना अभिभावकों को दे सके | वर्ष 2011 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा कराए गये सर्वे में जुटाए गये तथ्यों के मुताबिक बाल यौन शोषण की घटनाएं में 50% से अधिक पीड़ित लड़के हुए है | | दुनिया का हर पांचवां बच्चा भारत में रहता है अतः  ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिर्फ कानून काफी नही बल्कि हमारी जागरूकता भी आवश्यक है |

योगेश धस्माना 

उत्तराखण्ड

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