#बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

Posted by Poonam Singh
January 2, 2018

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बेटी पढ़ाओ, बेटी पढ़ाओ!! ये योजना स्कीम जब हमारे प्रधान मंत्री द्वारा 2015 मे लागू किया गया तो मानो हमे  लगा की चलो अब हमारी बेटियाँ पढ़ेगी भी और बच भी जाएंगे जहाँ छोटी बचियों को इस दुनिया मे आने से पहले मार दियाँ जाता हैं। मारना एक मज्जबुरी का नाम बी दे सकते हैं, जैसे  गरीबी से लोग आज भी झुजते हैं और लड़कियों के पालन पोषण का ज़िम्मेदारी जहाँ नही उठा पाते. देश के कुछ राज्यों मे ऐसा होता हैं जहाँ गरीबी और कुछ प्रथा कह सकते है जो सदियों से चली आ रही.

अब तक कम से कम सौ करोड़ का  लागत गिरा हैं  इस योजना को घर घर तक पहुंचाने मे और बचियों को स्कूल जाने मैं सहायता देने मे। कुछ लोगो का मन बदला और वो अपने  बचियों को स्कूल भेजने भी लगे. कूँछ  बदलाव आया हैं ऐसा हम मान ने लगे। परंतु मेरा सवाल ये हैं की क्या लड़कियों को पढ़ाने से सब  समस्या का हल निकल जाएगा?? पढ़ने के बाद भी वही राज्यो के लोग उनसे रोटी बनाने का काम करवाते हैं। खाना बनाना या घर  का काम करना हम सबका  कर्त्येब हैं परंतु आपसे ये कह कर काम करवाया जाए की बस येही तुम्हारा काम है तो हमारा वजूद कहीं हमसे  ये कहने लगता हैं की हुमे पढ़ाया ही क्यूँ था?

लड़कियों को बचाया जाए क्यूंकी लड़कियों का रैशियो 943 आस पास हैं 1000 लड़को के बदले। असमंजस की बात ये हैं की जहाँ ये लड़कियों को बचते हैं वही उनका सोशन करते हैं, लड़कियों पर एसिड अटैक, गंग रेप, लड़की का सोशन, लड़की का बाल विवाह जैसे आए दिन मामले सुन ने को मिलता हैं। जिनके कारण लड़कियाँ खुद खुशी कर लेती हैं या मार दी जाती हैं। तो जिस रैशियो का तालमेल बनाने की सोच रहे थे वो तो इन सब कारणो से वही का वही रह गया. हमे कुछ अलग कानून बनाना चाहिए जह्न लड़कियों को बचाने से ज़्यादा उन्हे मारने से रोके.

बस हम सभी को ये समजना चाहिए जितना हम शिक्षा हम अपनी बेटियों को दे रहे उतनी ही मात्रा मैं लड़को को भी दिया जाए की लड़कियों की इज्ज़त कैसे करे। हमे समाज मैं अभी भी बहूत सुधार लाने की जरूरत हैं। आने मैं समय लगेगा , परंतु होगा जरूर .

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