“भीमा कोरेगांव की घटना “

Posted by Ram Kishor Soothwal
January 10, 2018

Self-Published

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“भीमा कोरेगांव की घटना”

बीते 1जनवरी को भीमा कोरेगांव में जो कुछ घटित हुअा. उसकी जितनी निंदा की जाये कम है… क्या आजादी की स्वतंत्रता खत्म हो गयी है देश में जो कि इस तरह का घातक अंजाम हुअा.. इस घटना ने एक बार फिर देश में दलित और गैर दलित के बीच एक नया संघर्ष पैदा कर दिया है जो कि इस देश के संवैधानिक ढांचे के लिए सहीं नहीं है…

#भीमा कोरेगांव का इतिहास : भीमा नदी के किनारे एक गांव है कोरेगांव जो महाराष्ट्र में स्थित है… जहां पर 1 जनवरी 1818 को अंग्रेज सेना की तरफ से 500 महार जाति के सैनिकों ने पेशवा बाजीराव द्वितीय की 28000 सेना को हरा दिया था… दलित समुदाय इस जीत को अपनी वीरता और शौर्य का प्रतीक मानता है… इस जीत के बाद पेशवा शासन का अंत हो गया था..इस जीत की खुशी में अंग्रेजो ने भीमा कोरेगांव में विजय स्तम्भ का निर्माण करवाया था..तब से लेकर हर साल दलित समुदाय यहां पर 1 जनवरी को अपनी विजय गाथा का गुणगान करता आया है.. बीते एक जनवरी को यहां लगभग तीन लाख लोग इक्ट्ठा हुये थे 200 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए.. जिसमें मुख्य रूप से भीमराव अम्बेडकर के पोते प्रकाश अम्बेडकर. दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और जेएनयू दिल्ली के छात्र नेता रहे खालिद मसूद भी थे… तभी यहां पर यह घटना घटी जिसकी आग समूचे महाराष्ट्र में फैल गयी. बस, कार जलायी गयी ! इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गयी और कई घायल हुये… . जमकर हंगामा किया कथित गैर दलित समुदाय के द्वारा… जो कि नहीं करना चाहिए था..क्या दलितों को ये सब करने का अधिकार नहीं हैं….

#क्यूं हुआ भीमा कोरेगांव का युद्ध : अगर इतिहासकारो की बात माने तो महार जाति पर बहुत बुरे बर्ताव पेशवाओं के द्वारा किया जाता था.. उनके लिए सार्वजनिक जगहों पर जाना मना था.. उनको कुंए पर पानी नहीं भरने दिया जाता था… सब जगह पर सवर्ण जाति का बोलबाला था… इन्हीं व्यवस्था से तंग आकर महार जाति के पास मौका भी था.. इसलिए उन्होने अंग्रेजी हुकूमत के साथ मिलकर यह लड़ाई लडी…

अब इस घटना के बाद मैं एक बात बताना चाहूंगा कि गैर दलितों ने इस विजयी वर्षगांठ को लेकर कहां हैं कि अंग्रेजों की जीत का जश्न क्यूं ??.तो मैं कुछ फैक्ट दे रहां हूं.. उनका भी जवाब गैर दलितो को देना चाहिए…

1.अगर भीमा कोरेगांव की लड़ाई ऐतिहासिक नहीं है तो तो दिल्ली में बना इंडिया गेट को आप किस नजर से देखते हैं.. क्योंकि यह भी तो अंग्रेजो ने ही बनाया था.. जो कि भारतीय सैनिक प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुये थे.. उनकी याद में.. इस पर 13000 शहीदों के नाम उकेरे गये हैं… जबकि ये सैनिक ना तो भारत की आजादी के लिए लड़े थे…

2.हाइफा का युद्ध 23 सितम्बर 1918 को हुआ जिसमें भारत की दो रियासतों जोधपुर और मैसूर ने इजरायल के हाइफा शहर को तुर्की से मुक्त करवाने के लिए लड़ाई लडी और युद्ध में विजय भी पायी. यह लड़ाई भी तो अंग्रेजो के कहने पर लड़ी गयी थी.. जहां पर भारतीय सैनिकों की विजयी गाथा लिखी गयी हैं.. और आपको याद दिला दु़ू़ं कि गत वर्ष जब मोदी जी इजरायल गये तो वहां पर इन्होने उस हाइफा के शहीदों को नमन किया था… यह भी तो युद्ध अंग्रेजी हुकूमत के कहने पर हुआ था. फिर कोई इस पर गैर दलित वर्ग क्यूँ नहीं बोलता… फेहरिस्त काफी लम्बी हैं.. लेकिन इनके जवाब मिल जाये तो बेहतर होगा…

खैर जो भी हो इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए.. अगर आप भारतीय संविधान पर यकीन करते हैं तो यहां पर सभी को अपनी बात रखने और कहने की स्वतंत्रता हैं.. अगर किसी की आजादी को आप दबाना चाहेंगे तो इसके दुष्परिणाम देश के लिए घातक सिद्ध होंगे…

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