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मीडिया और एजेंडा

Posted by Shalini Srivastava
January 27, 2018

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बदलाव ज़रूरी है और हर चीज़ समय के अनुरूप बदल रही है। जिस तेज़ी से संचार और प्रौधोगिकी बदली है उसी तेज़ी से उसका इस्तेमाल भी बढ़ा है । मगर इन सबके बीच दो महत्वपूर्ण, बड़े और घातक बदलावों के रूप में प्रचार और एजेंडा सेटिंग को माना जा सकता है । आज के दौर में पब्लिसिटी और एजेंडा सेटिंग सिद्धांत को ना सिर्फ भारत के सन्दर्भ बल्कि पूरे विश्व के परिपेक्ष्य में देखा जा सकता है । भारत में मोदी और अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप इसके सबसे बेहतरीन उदहारण है । ये शुरुआत से ही अपने एजेंडा और पब्लिसिटी को बनाकर या लेकर चल रहे है ।

जब पब्लिसिटी या एजेंडा सेटिंग सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया था,तब शायद इन चीज़ों का इस्तेमाल इतना बढ़ चढ़ कर नहीं था , जितना की आज हो रहा है । राजनीति और मीडिया ने प्रचार और एजेंडा को इतना महत्वपूर्ण बना दिया है कि इसके बगैर ना तो राजनीति का काम चलता दिख रहा है ना ही मीडिया की कल्पना की जा सकती है ।
आज ज्यादातर मीडिया उसी मुद्दे को लेकर सामने आती है जिससे कोई विवाद जुडा हो या विवाद खडे होने की संभावना हो। मीडिया द्वारा एजेंडा सेटिंग ज्यादातर नकारात्मक या शांत मुद्दों , सामाजिक अथवा राजनितिक मुद्दों को बार-बार प्रसारित और रिपोर्टिंग कर किया जाता है । ताकि जनता उन मुद्दों को महत्वपूर्ण समझ ले और मीडिया की सोच को जनता अपनी सोच बना ले। जब मीडिया की सोच और जनता की सोच में एक गैप या अंतराल आता है तब मीडिया पर लोगों की विश्वसनीयता घटती है या अंशतः कम होने लगती है ।
जब राजनीति के दबाव में या उसको तुष्ट करने के लिए मीडिया अपना एजेंडा तय करती है तब यह सबसे घातक होता है । आजकल राजनीति और मीडिया दोनों अपनी पब्लिसिटी तथा एजेंडे के लिए साथ काम कर रही है जिससे लोगों तक वही जानकारी पहुँचती है जो राजनीतिज्ञ चाहते है और इससे मीडिया को भी पूरा राजनीतिक सहारा मिलता है । ऐसे में मीडिया तथा राजनीति दोनों स्वार्थी होकर अपना हित साध रहे है मगर लोकतंत्र को बहुत नुक़सान पहुँच रहा है ।
आज जब प्रसार प्रयास एक बहुत जरुरी अंग बन गया है। जीवन का महवपूर्ण हिस्सा बन कर उभर रहा है । ऐसे में कोई भी व्यक्ति पब्लिसिटी से दूर रहना नहीं चाहता और डिजिटल दुनिया ने हर व्यक्ति को अपनी पब्लिसिटी के अनेकों अवसर प्रदान किये है । पब्लिसिटी आजकल लोगो पर इतनी हावी है कि नकारात्मक प्रसार से भी लोग आज हीरो बन कर उभर रहे है । प्रचार-प्रसार की जरुरत हर किसी को है मगर यह प्रसार अगर दिखावे के लिए या नकारात्मक रूप में होने लगे तो भविष्य में इसके कई नुक़सान सामने आ सकते है । आजकल राजनीति में लोकलुभावन बातें इसी का हिस्सा है । वास्तविकता की धरातल में लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा मगर नोटबंदी और जी एस टी तथा अर्थव्यवस्था को प्रसार के जरिये सुदृढ़ दिखाकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है । आम इंसान रोजी रोटी में इतना व्यस्त है कि सरकार के किसी भी अत्याचार को ना तो वह समझ सकता है ना इसका विरोध कर सकता है।
यह पब्लिसिटी ही है कि नार्थ कोरिया का तानाशाह आज मीडिया में हीरो है और तमाम सामाजिक समस्याएं पीछे ।मोदी या डोनाल्ड ट्रंप की छाप पुरे विश्व में दिखाई दे रही है और किसानों, विज्ञानिको और पर्यावरणविदों की अवहेलना होती दिख रही । जहाँ अनुसन्धान ,स्वास्थ्यऔर शिक्षा को सबसे जरुरी रूप में प्रोत्साहित किया जाना चाहिए वहाँ वायरल वीडियो,आंतकवाद,और धार्मिक मुद्दों पर राजनीति मीडिया में आम होती चली जा रही है ।

एक मीडिया रिपोर्ट से पता चलता है कि मोदी सरकार पिछले दो साल में सिर्फ प्रचार पर 11 अरब रुपये से अधिक खर्च कर चुकी है। यह प्रचार किसी योजना का होता तो एक बात होती मगर यह मोदी जी की चुनावी रैली बैनरो व् पोस्टरों सम्बंधित हर तरह की मीडिया में प्रसार के मद में था जिसका विरोध विरोधी पार्टियों में किया गया ।
आज डिजिटल प्लेटफार्म और विकसित तकनीक के आ जाने से युवाओं में एक नए तरह का जोश देखने को मिल रहा है । जल्द से जल्द फेमस होना हर युवा की चाहत में शुमार है । ऐसी चाहत आज हर तरफ हर उम्र के लोगो के भीतर देखी जा रही है । राजनेता से अभिनेता फेमस होने के लिए बयानबाजी,स्लट शब्दों का प्रयोग कर रहे है । अपमानजनक टिप्पड़ी तथा नकारात्मक जातिगत धर्मगत हिंसा को उकसाने सम्बंधित विचारों को डिजिटल माध्यम में प्रेसित कर लाइम लाइट में आने की कोशश में आज सभी अपनी सीमाएं भूलते जा रहे है ।
प्रसार और एजेंडा जिस मकसद से बनाया गया था वो सही था मगर आज उसका स्वरूप बिगड़ता चला जा रहा है । अगर जल्द ही दिखावे भरी पब्लिसिटी और नकारात्मक एजेंडे वाले लोगों को रोका ना गया तो यह एक ट्रेंड बन जायेगा और आने वाले समय में लोग काम नहीं बल्कि सिर्फ उसके प्रचार प्रसार और एजेंडा पर फोकस करेंगे । यह युवाओं तथा आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए नकारात्मक ऊर्जा लेकर आएगा । प्रसिद्धि पाना सभी का अधिकार है मगर यह उपलब्धि से सुनिश्चित हो न की किसी एजेंडे अथवा नकारात्मक या दिखावे वाली प्रचार प्रसार से ।

शालिनी श्रीवास्तव
मुक्त लेखिका व्
पूर्व रिसर्च एसोसिएट
केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान,लखनऊ

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