मैं युवा बोल रही हूँ

Posted by Sharda Dahiya
January 22, 2018

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हेल्लो इंडिया

मैं आज की युवा बोल रही हूँ आज दिल भर आया है इसीलिए ओपन प्लेटफ़ॉर्म पर देश के युवा के दिल की बात लिख रही हूँ | कभी लगता था की मेरा देश,मेरा भारत ,मेरी धरती ,मेरी माँ ,मेरा अपना मुल्क | मगर आज वो अहसास मर रहे हैं कौनसा देश ? जहाँ पकौड़े बेचने वाला रोजगार वाला है या वो देश जिसमे p.hd करने के बाद भी आप क्लर्क की नौकरी के लिए जाते हैं | जो काम दसवीं पास या बाहरवीं पास कर सकता है उसके लिए p.hd या m.tch वाले आरहे हैं   या वो देश जिसमें डिजिटल तो सब कुछ है मगर अकाउंट में पैसे नहीं है | जितनी मेहनत अपने पार्टी पोस्टर और प्रचार में पैसे लगा कर बर्बाद किये उससे  थोडा काम ,रोजगार उत्पन करने की दिशा में किया होता तो आज गूगल के 70% इंजिनियर भारत के नहीं होते या अमेरिका में भारतीय नहीं होते  और प्रचार में भी पैसे नहीं जाया करने पड़ते आपका किया काम सच में बोलता | कर क्या रहे हैं है हम आधार कार्ड को कभी सुप्रीम कोर्ट में लेकर जाते हैं तो कभी गंगा को लिविंग एंटिटी का दर्जा दिलाते हैं | जो सच में लिविंग एंटिटी है उनका क्या? जो भूख मरी से मर रहे हैं जिनको एक वक्त की रोटी नहीं मिल पा रही | अरे सुप्रीम कोर्ट की बात ही मत कीजिये सब भ्रष्टों का अड्डा होगया है | बात अगर इलेक्शन की तो हर हाल में 1 से 2 महीने के अंदर सरकार का  प्रचार भी चल जाता है और इलेक्शन भी हो जाता है और तो और सरकार भी बदल जाती है वहीं अगर बात हो नौकरी देने की  तो देख लीजिये 2015 में हुआ cgl 2018 तक लटक रहा है  कब 2015 का हिसाब होगा ,कब 2016 का निपटारा और कब 2017 वाले आयेंगे लाइन में    | जो इंजिनियर अमेरिका गये अगर उनको उनकी मेहनत के हिसाब से मेहनताना दिया होता तो क्या उनकी बनाई तकनीक आप लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं करती या रोजगार के अवसर नहीं उपलब्ध नहीं कराती| जनता को इतना भी मुर्ख मत बना के रखिये की वो भूल जाए की देशभक्ति भी कोई चीज़ होती है | आज के वक्त में को साइंटिस्ट कोई  नहीं बनना चाहता कोई फौजी नहीं बनना चाहता पता है क्यों ? क्यों की आप लोगों ने फौजी की मौत पर बस RIP लिखना सीखा है  और या बस फूल चढ़ा कर इतिश्री कर ली है | मैं आज खुद अपने भाई को मना करती हूँ की फ़ौज या किसी भी इंडियन फाॅर्स को ना ज्वाइन करे क्योंकि भारत को उसकी सीमा सुरक्षित रखने वालों की मेहनत और जज्बे की कद्र नहीं है |उनके लिए मरने वाला बस और बस एक जवान होता है ना किसी का भाई ना किसी का बाप और ना ही किसी का बेटा होता तो क्यों अपनी जान को दांव पर लगाये उनके लिए | जिनके पहनने वाले सूट एक जवान की जिन्दगी भर की पूंजी से महंगे होते हैं | उनके पास जवानों की हालत का जायजा लेने का वक्त नहीं होता मगर उनके पास वक्त होता है ये पता करने का की दूसरी पार्टी को कैसे निशाने पर लाये किस को कैसे नीचा दिखाए | श्रम आती है मुझे आज की देश की राजनीती पर ये लोग तो बच्चों से भी गये गुजरे है हमे कम से माँ बाप ये तो सिखाते थे की बेटा लड़ना नहीं है आराम से खेलना है ये तो इस लायक भी नहीं है | कभी मैं कहती थी भ्रष्टाचार नहीं करना चाइए आज मैं कह रही हूँ करो जितना हो सकता है बस फसना मत | अब लगता है पढ़ो लिखो और निकल जाओ वहाँ जो तुम्हारे टैलेंट की कद्र करे | इस देश को वैसे भी गटर बना दिया है इन राजनेताओं ने तुम खुद को उसकी गंदगी मत बनने दो |

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