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राष्ट्रवाद मेरी कलम से

Posted by Samar Ishrat Ashif
January 1, 2018

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राष्ट्रवाद दो चीजो से मिलकर बना शब्द है राष्ट्र + वाद। राष्ट्र शब्द का अर्थ किसी देश से है जो की वहां पर निवास करने वाले जनजातियों के समूह से बनता है। वाद एक प्रत्यय है जो किसी भी शब्द के साथ जुड़कर उसके महत्व को बताता है। चूँकि मैं सरल भाषा में बात करना पसंद करता हूँ तो मैं राष्ट्रवाद को देश के प्रति लोगो की आस्था और महत्व बोलना चाहूंगा। राष्ट्रवाद का वर्णन जितना जटिल है उतना ही उस विचार पर चलना और उसे धारण करना है। राष्ट्रवाद के बारे में बुनियादी तौर पे ज्यादा जानकारी न होने की वजह से एक बड़े समूह और वर्ग के समक्ष इसे देशभक्ति का चोला पहनाकर पेश किया जाता है जो की एक रूढ़िवादी या कह सकते है खराब मानसिकता का नतीजा है जिसके दूरगामी परिणाम बहुत ही दुखद हो सकते है। राष्ट्रवाद को समझने से पहले हमें ये जानना आवश्यक है कि राष्ट्रवाद हम सब से जन्मा है न की हम सब राष्ट्रवाद से जन्मे है। इसलिए समय के साथ राष्ट्रवाद की वैचारिक सोच या नीतियों को बदला जा सकता है अपितु उससे किसी विशिष्ट वर्ग की हानि न हो रही हो। हम सभी खासकर युवाओ को राष्ट्रवाद के बारे में जानना और समझना बहुत ही आवश्यक है कि जिससे हम एक परिपक्व राष्ट्र की स्थापना कर सके या करने में सहयोग दे। हमे देशभक्ति को राष्ट्रवाद से अलग रखना चाहिए और इसको एक मार्गदर्शक की तरह देखना चाहिए क्योंकि ये हमारे पूर्वजों की कड़ी तपस्या से ही आज इतनी आधुनिक हो पाया है। आज हमें समझने की जरुरत है कि देश की एकता और अखंडता सभी प्रकार के तबको के लोगो के साथ चलने और रहने से ही बरकरार रहती है जो की एक खुशहाल राष्ट्र की सबसे पहली जरुरत है । राष्ट्रवाद को औज़ार बनाये न की हथियार क्योंकि औज़ार से हम निर्माण करते है पर हथियार हमेशा विनाश का कारण होते है।

समर आसिफ

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