विलुप्त होती संस्कृति

Posted by Satyam Singh
January 15, 2018

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

कल यानी 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश मे बड़ी धूमधाम से मनाया गया । इस पर्व को पूर्वांचल के जिलो में खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है । खिचड़ी का पर्व पहले बहुत धूमधाम से मनाया जाता था । किन्तु आज के भागदौड़ भरी जिंदगी मे लोग इस त्योहार को भूलते जा रहे है । आज आलम यह है कि हमारी नयी पीढ़ी इस त्योहार को पूरी तरह से भूल चुकी है ।  अब यह त्योहार कुछ गावों के चारदीवारी मे सिमट कर रह गये है ।

खिचड़ी के ही तरह बहुत ऐसे त्योहार है जो विलुप्त होने की कगार पर है । बहुत से विलुप्त भी हो चुके है । हमारे त्योहार हमारे लिए सिर्फ एक पर्व ही नही हमारी वर्षो पुरानी परम्पराओ की भी याद दिलाते है। ये त्योहार हमारी संस्कृति के परिचायक भी है । किंतु हमारी आज की भागदौड़ भरी जिंदगी मे आज हम इतने व्यस्त है कि हम अपने त्योहारो अपने संस्कृति अपनी सभ्यता को भी भूलते  जा रहे है ।यह हमारे लिए एक प्रकार से हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए एक तरह से हानिकारक भी है।

हमे अपनी संस्कृति , सभ्यता को बचाने के लिए हमें खुद ही आगे आने होगा।

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.