शंभूलाल को महिमामंडित करने वालों को एक सबक!

Posted by Ashish Kumar
January 16, 2018

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राजस्थान के राजसमंद में हुए लाइव हत्याकांड के आरोपी शंभूलाल रैगर को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक, राजस्थान पुलिस ने इस मामले में जो चार्जशीट दायर की है उसमें इस बात का खुलासा हुआ है कि आरोपी शंभूलाल रेगर जिस लड़की को अपनी बहन बताकर पूरे हत्याकांड को लव जेहाद की आड़ में छिपाने की कोशिश कर रहा था, उसी लड़की से इसके अवैध संबंध थे। अपने इसी अवैध संबंध को छुपाने के लिए ही शंभूलाल ने ये पूरा घटनाक्रम रचा था।

चार्जशीट के मुताबिक, शंभूलाल उस लड़की को एक बैंक मैनेजर के पास भी ले गया था और कहा कि इन्हें खुश कर दो तो तुम्हारा लोन पास हो जाएगा। बताया जा रहा है कि शंभूलाल इस बात से खफा था कि लड़की बल्लू शेख नामक मजदूर के संपर्क में अभी थी जिसके साथ वो 2010 में भाग कर गई थी। चार्जशीट के मुताबिक शंभूलाल ने हत्या के एक साल पहले से ही हिन्दू और मुस्लिमों से जुड़े वीडियो देखने शुरु कर दिए थे जिसमें लव जिहाद, कश्मीर मसला, राम मंदिर और इस्लामिक जिहाद जैसे मुद्दे शामिल थे यानी शंभूलाल ने काफी पहले से इस हत्याकांड को अंजाम देने की तैयारी शुरु कर दी थी। कुछ इस तरह की ख़बरें भी सामने आ रही हैं कि दरअसल, शंभूलाल अफराजुल को नहीं बल्कि बल्लू शेख को मांरना चाहता था लेकिन जब इसमें कामयाब नहीं हुआ तो दहशत पैदा करने के लिए उसने अफराजुल की हत्या कर दी।

और विडंबना देखिए कि बिना सोचे समझे इस तरह की वहशी मानसिकता रखने वाले आरोपी को कुछ लोग हिन्दू धर्म का रक्षक बताने में लगे थे। लोग उसकी आर्थिक मदद भी कर रहे थे। उसके समर्थन में उदयपुर कोर्ट पहुंचे लोगों ने संविधान को ताक पर रखते हुए कोर्ट के मेन गेट पर भगवा ध्वज भी लगा दिया था। राजस्थान पुलिस की चार्जशीट से हुए इस खुलासे के बाद अब वो लोग क्या कहेंगे जो शंभूलाल का महिमामंडन कर रहे थे? क्या इस तरह के जघन्य अपराध के आरोपी को महिमामंडित करने वाले इस बात के लिए माफी मांगेगें? किसी बात का समर्थन करने से पहले हमें स्वयं उस बात की जांच करनी चाहिए बजाय भावनाओं में बहकर उसका समर्थन करने के।

इस तरह के कुकृत्य को अंजाम देने वाले लोग चाहे वो जिस धर्म या वर्ग से ताल्लुक रखते हों, समाज के लिए नासूर की तरह होते हैं जो समाज को तोड़ने और उसे नष्ट करने का काम करते हैं। ऐसे लोगों का समर्थन करने के बजाय इनका बहिष्कार करना चाहिए जिससे कि कोई और इस तरह की वहशियाना हरकत करने से पहले सौ बार सोचे। शंभूलाल को महिमामंडित करने वाले लोग एक बार फिर सोचें कि वो समाज को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं?

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