शायद कल मैं भी हो सकती हूँ

Posted by Swati Agarwal
January 28, 2018

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अक्सर जब घर आती हूँ तो टी.वी देखने का मौका मिल जाता है और तभी टी. वी के कुछ शो पर नजर पड़ती है, जैसे डिटेक्टिव दीदी। यह एक प्रयत्न है एसिड अटैक की घटनाओं को रोकने का, पर जब मै अपनी मम्मी के साथ ये शो देख रही थी तब मेरे मन में सवाल आया कि कहीं मेरे साथ भी ऐसा हुआ और कहीं मैं भी न्यूज़ चैनल्स और अखबारों की हैडलाइन न बन जाऊं? एसिड अटैक की वजह कोई दूसरा नही, हम हैं क्योंकि हम लड़कियाँ कहीं न कहीं कमजोर पड़ जाती है और कानून का दरवाजा खटखटाने से डरती हैं। लेकिन ये एक अटैक हमारा अस्तित्व हमसे छीन लेता है और अगर हम तब भी खड़े हो जाये तो ये समाज हमें जीने नहीं देता। हर लड़की अटैक होने पर भी आवाज़ नहीं उठाती क्योंकि वो तब भी डरती थी जब वो सपनों को पूरा करने के लिए उड़ान भर रही थी और वो तब भी डरी जब कुछ मनचलों ने उससे उसका अभिमान छीन लिया। आज कोई और है कल शायद मैं या आप भी हो सकते हैं, इसलिए जरूरत है खुद के लिए आवाज उठाने की न कि समाज के डर से चार दिवारी में बैठ जाने की।

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