समाज

Posted by आकाश भारतीय
January 20, 2018

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कुछ तो है अलग जो स्वप्न सा है

मेरा समाज आज भी कोहरे जैसा है ।।
धुंधली सी आश आज भी जीवंत है
ओश की बून्दो जैसी,,
विकास की रफ्तार धिमी है ।।
आज सच का सामान कोई नहीं करता
वाकई समाज हमारा बदल रहा है ।।
 सोच अलग है सबकी मगर,
आज फिर गरीब के निगाहो में बेरूखी का मौसम है ।।
वाकई समाज हमारा बदल रहा है ।।
__आकाश कुमार प्रसाद
    (हसपुरा औरंगाबाद महुआङ)
        बिहार ।।

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