सोच

Posted by meenakshi bharadwaj
January 21, 2018

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मुझे आज बहुत दुख हो रहा है एक औरत होने पर…सच में और उससे भी ज्यादा दुख हो रहा है इसलिए क्योंकि आप और मैं ना तो कुछ करते हैं और ना ही कुछ करेंगे | मैं भी क्या करूंगी शायद ये आर्टिकल मेरा लिख दिया जाएगा और मैं फिर नए किस्से पर एक और कहानी लिख डालूंगी | बदलेगा क्या ? बस मेरा आर्टिकल | लेकिन सोच, क्या मज़ाक कर रहे हैं ? सोच थोड़े ना बदलेगी हमारी, ना सवाल ही नहीं उठता |
मैं तो अपने घर के आस-पास के लोगों की सोच नहीं बदल पा रही तो और किसी की क्या बदलूंगी | मेरे बस की नहीं है | मेरी भांजी हुई है इतनी प्यारी है कि उसका चेहरा देखकर सच में वो कहते हैं ना बच्चे भगवान का रूप होते हैं और मंदिर में जैसे घुसते ही शांति का अनुभव होता है | बस, उसकी शक्ल देखकर मुझे बिल्कुल वैसा लगता है | लेकिन उससे भी ज्यादा मुझे वो बात याद आती है जब मैं उसी के घर में ये सुनती हूं कि अगली बार बेटा होगा | ये लफ्ज़ मेरी बहन के घर के एक सदस्य के थे, मेरी गली की उस आंटी के थे जो मुझे मेरी भांजी से मिलने से पहले कहती कोई बात नहीं , सब किस्मत है | उस वक्त उन्होंने अपनी गोद में अपनी पोती को उठाया हुआ था | काश, कि वो नन्ही सी जान ये समझ पाती और तुरंत अपनी दादी की गोद से उतरकर कहती, जाओ, मुझे नहीं रहना ऐसी गोद में जिसमें मेरे लिए प्यार नहीं है बस उठाया हुआ है एक बोझ की तरह |
मैं जानते हैं ये क्यों नहीं झेल पा रही क्योंकि मेरे मां-बाप ने मुझे कभी भी, कभी भी नहीं एहसास दिलाया कि उन्हें दुख है कि बेटा नहीं है | वो सच में ये मानते हैं कि लड़का-लड़की सब एक जैसे हैं वो दूसरों की तरह ये बात सिर्फ़ कहते नहीं है मानते भी हैं | कोई माई का लाल नहीं जो उनके सामने ये कह जाए , कि बहनजी कोई बात नहीं बेटियां हैं तो | लेकिन उस दिन मेरी मां की आंख में आंसू आ गए जब पड़ोस की वो अजीब आंटियां जो दिन भर अपने दरवाज़े के बाहर खड़े रहकर हर घर की चुगली करती हैं मेरी मां को बधाई देने आई थीं, बधाई कुछ ऐसी थी ” अच्छा नॉर्मल हुआ है, वाह बहनजी सही हुआ ये तो, चलो कोई बात नहीं इस बार लड़की हुई तो अगली बार जो हो जाएगा लड़का ” मेरी मां ने फिर कहा- बहन जी ना कभी फर्क किया है ना करेंगे | मेरा सच में मन कर रहा था उनके बाल नोचने का, औरतें क्यों थीं वो सेक्स चेंज क्यों नहीं करवा लिया उन्होंने अपना भी और अपनी बेटियों का भी | या जन्म लेने से पहले उनके मां-बाप ने उन्हें मार क्यों नहीं डाला ? सच में ऐसे ही ख्याल आ रहे थे मेरे मन में | और अभी भी सुन के मेरा ख़ून खौल जाता है | भगवान के लिए बस करो अब 21वीं सदी है, लड़कियां लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलकर चल रही हैं, ये सब बकवास ना करो, करना है कुछ तो अपनी सोच बदलो ….काश ! कि किसी ऐसे घर में बेटी ना हो जहां वो ये सुने, चलो कोई ना, अगली बार लड़का सही |
मैं इतना भर गई हूं कि इस पर लिखते-लिखते शायद पूरी किताब लिख डालूं लेकिन बात तो फिर वही है कि किताब के पन्ने खराब होंगे और मेरी स्याही, पर जो बदलना है वो नहीं बदलेगा और वो है —-सोच |

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