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स्मार्ट फोन की दुनियाँ मे किताब कहीं खो गयी हैं।

Posted by Poonam Singh
January 14, 2018

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वैसे तो हमार बचपन ऐसे समय पर गुजरा जहां सिर्फ किताबी दुनिया थी।जो भी जानकारी लेनी हो हम घंटो किताबों पे बैठ कर शोध करते थे। हाँ थोड़ा समय लगता था परंतु शोध का एक अलग परिणाम निकलता था जो अपनी मेहनत लगती थी और अपने दोस्तो का साथ रहता था । कोई समय कि बर्बादी किसी फिजूल कामो मे नहीं लगता था । खेलने  कूदने का भी समय पर्याप्त मिलता था । मानो हम एक दूसरे से मिलकर, खेलकर और अपनी जानकारी बाटने से अच्छा लगता था। ज़्यादातर तो पुस्तकलाए मे भी लोग दिखते थे। बहोत से लोगो को उपन्यास पढ़ते हुए भी पाया जाता था। अच्छा लगता हैं।

डिजिटल के नाम पर सिर्फ थोड़ा समय संगणक मे मिल जाता था। बस लोग उसी मे खुश रहा करते थे परंतु वो कहते हैं न की इंसान की चाह  की कभी अंत नहीं होती. जितनी अछि चीज़ उतनी ही खतरनाक . वैसे ही धीरे-धीरे क्रांति आई और नेटवर्क की दुनिया फैलती गयी दुनिया मे. स्मार्ट फोन जो आ गया। एक छोटी सी 5 इंच के स्क्रीन वाली चीज़ मानो पूरी दुनिया पलट दी। एक छोटी सी समान जो आपको हर काम बहोत ही प्रयाप्त समय मे कर दे तो लोग पुरानी जिंदगी क्यूँ अपनाए।  विडियो कॉल, तरह तरह के गेम,ऑनलाइन मार्केटिंग एप्लिकेशन और बहोत सी सुख सुविधाए वाली एप्लिकेशन बस एक छोटी सी स्क्रीन दे रहा हैं। धीरे धीरे हर स्कूल के बच्चे अपना प्रोजेक्ट या किसी भी सवाल को ढूंढने के लिए बस एक गूगल करते हैं और चंद मिंटो मैं जवाब पा लेते हैं। धीरे धीरे लोगो के उपनायास अब डिजिटल ऑनलाइन बुक्स मे परिवर्तित हो गयी। बस एक छोटी सी समान ने पूरी दुनिया को एक स्क्रीन मे समेत दियाँ हैं।

कहानियों की किताबे अब न हमे  बच्चो के हाथ मे दिखते हैं और नहीं कोई हमे  पुस्तकलाए मे घंटो बैठे नज़र आते हैं। हम कहीं अपनी ही सुखसुविधायों के पीछे इतनी दौर लगा दिये की हमारी कुछ अच्छी आदते पीछे रह गयी। ऐसा नहीं की स्मार्ट फोन हमारे लिए अच्छा नहीं हैं बल्कि काफी फायदा देता हैं परंतु जहा अच्छाई होती हैं वही बुराइया भी होती हैं।

हमे किताबों की दुनिया से वंचित नहीं होना चाहिए॥ हमे खुद मे बदलाओं लाकर बच्चो को भी यही सीख देनी चाहिए।

 

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