स्वच्छता एक संकल्प !!

Posted by Vidya Bhooshan Singh
January 11, 2018

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स्वच्छता एक संकल्प !!

कुछ लोगों के नजरों में काम कितना ही गंदा क्यों न हो लेकिन मुझे नही लगता………..
किसी ने सही कहा है की इरादे नेक हों तो मंजिले आसान लगने लगती है ।
आदरणीय प्रधान मंत्री, श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के  द्वारा २ अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत स्वच्छ और सुन्दर भारत बनाने के सपने के साथ किया गया इस दौरान माननीय प्रधान मंत्री जी ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए २ अक्टूबर २०१९ तक भारत को खुले में शौच मुक्त करने का लक्ष्य निश्चित किया । इस कम को कर पाना इतना आसन नहीं था क्योंकि लोगो की सालों पुरानी आदत है खुले में जाना और उसके साथ साथ यह भी था की उनके पास खुद शौचालय बनाने का न तो पैसा था न ही तकनीकी । इस काम को अमली जामा पहनाने के लिए योग्य लोग भी न थे जो दूर दराज के पहाड़ियों एवं जंगलों में बसे लोगों तक पहुच सकें । इस मिशन में केवल एक ही चीज थी जो कि माननीय प्रधानमंत्री का विश्वास एवं नेक इरादा जिसको देखकर काफी युवा और समाजसेवी संस्थाए आगे आयीं और इस लक्ष्य को पाने के लिए अपना हर संभव कोशिस करने में लग गयी ।
इसी कड़ी में मैंने भी एक कदम स्वच्छता की ओर  बढाया और अपना घर, अपने लोग एवं वह सारी खुशिया जो किसी भी व्यक्ति को अपने माता -पिता से मिलती है उसको छोड़कर एक ऐसे प्रदेश जाने का निर्णय लिया जहाँ का नाम सुनते ही  मेरे माता-पिता खतरों का प्रदेश समझते थे लेकिन फिर भी इस मिशन से जुड़ने का जूनून मुझे अपने माता- पिता को समझा पाने में सफल बनाया । मेरे इस इरादे को हौसला मिला जब मेरे दोस्त(मेरी जिन्दगी) ने एक उम्मीद और विश्वास के साथ इस निर्णय के लिए आगे बढ़ने को  प्रोतसाहित किया । यह एक उम्मीद और विश्वास के साथ दिया गया प्रोत्साहन मेरे लिए लक्ष्य के साथ-साथ डर भी था कि मै अपने इस निर्णय पर खरा उतर पायूँगा की नहीं लेकिन सायद ये भी था की सफल या असफल होने के लिए निर्णय लेना तो जरुरी है । यह संदेह मेरे मन में इस लिए भी आ रहा था क्योंकि काम, स्थान और लोग तीनों मेरे लिए नये थे । इससे पहले न तो मै किसी तरह के  स्वच्छता सम्बन्धी परियोजना में काम किया था और न ही आदिवासी समुदाय से वाकिफ था लेकिन इन सभी कमियों के ऊपर सायद अपनों का एक भरोसा एवं कुछ कर गुजरने का जज्बा मुझे कुछ यूँ हिम्मत दिया कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य जिला कवर्धा में मुझे ऊनिसेफ समर्थित स्वच्छ भारत मिशन के लिए एक परियोजना में काम करने का मौका मिला यहाँ काम करते हुए मात्र अभी 70 दिन हुए थे जो सायद एक सौ बीस किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक बसें गांवों को घुमने के लिए कम थे लेकिन इस जज्बे और कुछ कर गुजरने की सोंच को परियोजना के विशेषज्ञ अधिकारी एवं ब्लाक के मुखिया ने अपने अनुभव एवं तकनीकी ज्ञान से कुछ यूँ पंख लगाया की मै इस पूरे विषय एवं परिवेश को कुछ ही समय में समझ गया और हर एक दृष्टिकोण से परियोजना पर पैनी नज़र बनाने में सक्षम रहा । इस दौरान मुझे हर एक दिन नए लोग नयी चुनौती और कुछ नया करने की सीख मिलती गयी और मेरे सीखने की भूख और बढ़ती गयी। इन सभी कामों को करते करते मुझे  रात-दिन का भी ख्याल नहीं रहा लेकिन बच्चे, बूढ़े, महिलायें एवं अन्य सभी हितग्राही स्वच्छ भारत के इस सपने को पूरा करने के लिए मेरे साथ जी जान से लगे हुए थे इनके आंखो में जब देखता था  एक सुकून सा मिलता था  एवं  मुश्किलों में होता था तो इन्ही को याद कर लेता था । इस दौरान मैंने लगभग हजारों नए लोगों से मिला एवं उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ जिसके बल बूते पर लगभग 81 ग्रामपंचायतों में 15000 से ज्यादा घरों में शौचालय बनवाने के साथ-साथ समुदाय संचालित गतिविधियों के माध्यम से लोगो को  प्रेरित कर शत-प्रतिशत शौचालय उपयोग को सुनिश्चित कर खुले शौंच मुक्त(ODF) गाँव बनाने में सफल रहा ।
बड़ी हंसी आती है जब AC चैंम्बर में बैठे कुछ अच्छे लोग जब ऐसा सोंचते है कि यह काम गन्दा है और इसको करने वाले लोग गंदे है  तो मुझे याद आता है कि ये सभी ठेकेदार इसी समाज को सुधारने का पैसा खा पी कर अच्छे बने है कितने लोग इन्ही के बहाने अपनी गाड़ी और बंगला बनाये है और फिर इन्ही पर हंसते है।

 

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