“हलाला” जैसी प्रथा पर चोट करती फ़िल्म “मिया कल आना” को मिल रही खूब सराहना

Posted by Vinod Rulaniya
January 22, 2018

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फिल्में समाज का दर्पण होती है। ये साबित कर दिखाया है, एक शार्ट फिल्म “मिया कल आना” ने। डारेक्टर शमास नवाब सिद्दीकी और प्रोड्यूसर नवाज़ुद्दीन सिद्दकी के द्वारा बनाई ये शार्ट फिल्म अब तक 23 अंतराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा चुकी है, 10 अवार्ड जीत चुकी है।


मुस्लिम समाज में व्याप्त “हलाला” प्रथा पर गहरी चोट करती हुई ये फिल्म 18 जनवरी को youtube पे रिलीज़ के बाद viarl हो चुकी है। इस फिल्म में तीन तलाक के बाद एक मुस्लिम दम्पति के हालात को बहुत बारीकी से फिल्माया गया है। इस फिल्म को देखकर समाज का वो रूप सामने आ गया जिसमें केवल प्रथा और कानून के नाम पर कैसे एक औरत के आत्म सम्मान के साथ चोट की जाती है। कैसे एक बेगुनाह औरत का समाज के लोगो के सामने सौदा होता है। कैसे सरेआम एक औरत के सम्मान को उसका सारा समाज अपनी परम्पराओ, प्रथाओ और अपने धार्मिक कानून के नाम पर कुचल देता है। हलाला एक मात्र ऐसी व्यवसथा ,जिसमे औरत को ही इसका परिणाम भुगतना पड़ता है। जबकि उसकी कोई गलती नही होती है।

“गुस्सा मर्द को आता है,तलाक मर्द देता है। फिर हलाला बेगुनाह औरत का क्यों, “हलाला मर्द का होना चाहिए”

यह फिल्म पुरे समाज के सामने उन प्रथाओ पर एक दर्पण के सम्मान है, एक प्रश्न के समान है, जो बेगुनाह औरत को प्रथा ,परम्पराओ, धार्मिक कानून के नाम पर अपना शिकार बनाती है। साथ ही ऐसी प्रथाओं ,कानूनों के चलते एक परिवार की क्या हालात और वो किस स्तिथि से गुजरता है, उसको बहुत ही बेहतरीन तरीके से समझाने का एक सार्थक प्रयास है। आज समाज को ऐसी फिल्मों किं जरूरत है,ताकि हमारे हर समाज में फैली औरत विरोधी कुप्रथाओं को बंद किंया जा सके। 21 सदी में एक औरत भी अपनी खुद की एक जिंदगी जिए, उसके आत्मसम्मान की रक्षा हो सके, उसकी भावनाओ की कदर हो,उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाये।

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