१०० वर्षीय कोयलांचल की आग अंतरराष्ट्रीय आपदा क्यों घोषित नहीं ?

Posted by Mohammad Sartaj Alam
January 5, 2018

Self-Published

कल्पना कीजिए कि दुनिया के मशहूर आइसलैंड जैसे ग्रेसबे , पलवान आदि द्वीप जिनकी खूबसूरती पर फ़िदा लाखों सैलानी भौरों की तरह प्राकृतिक सौंदर्य का रस पीने जमा होते हैं , अचानक आइसलैंड के चारों तरफ का पानी सुर्ख आग में तब्दील हो जाए , नलों से पानी की जगह सुर्ख आग की तपिश निकल रही हो , फूल पत्तों की खुशबू की जगह तरह तरह की गैसीय फ्यूम फैली हो , सोचिए ये फ्यूम अनेकों हानिकारक गैसों की मालिक हों , इन गैसों से तरह तरह की दुर्गन्ध वातावरण को अपनी गिरफ्त में कर रही हों , महसूस कीजिए वहां का मंज़र कैसा होगा ? कल्पना कीजिए कि आप भी वहीं मौजूद हों ? जी हाँ आप कभी कल्पना में भी ऐसी परिस्थिति के चश्मदीद नहीं बनना चाहेंगे।  नरक के समान ज्वालामुखी से भी खतरनाक ये कल्पना वह भी कोरी, नहीं बिलकुल नहीं , ये हक़ीक़त है.
              बात  १९२८ के जिला मानभूम अर्थात आज के धनबाद की हो रही है, वही जो आज़ादी पूर्व पूर्वी भारत का हिस्सा रह चूका धनबाद, आज़ादी पूर्व से आज तक झरिया आग का गवाह रह चूका धनबाद,  या फिर आज़ादी के बाद की रियासत बिहार का हिस्सा रहा धनबाद  ,आज भी अपने सबसे बड़े कसबे को अग्नि श्राप से मुक्त नहीं करा सकने की पीड़ा का दंश झेल रहा धनबाद,   जी हाँ आज के झारखण्ड का अभिन्न हिस्सा जो विश्व कोयलांचल की राजधानी कहा जाने वाला धनबाद.
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